काशी में उमड़ा आस्था का जन-सैलाब!: 10 लाख श्रद्धालुओं से जाम हुआ शहर वही भीड़ संभालने में छूटे प्रशासन के पसीने तो बैन करना पड़ा...?
काशी में उमड़ा आस्था का जन-सैलाब!

वाराणसी: दरअसल शहर में वीकेंड के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाटों तक पहुंचने वाली सड़कों पर श्रद्धालुओं का हुजूम दिखाई दे रहा हैं जिससे पूरे शहर में जाम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं को संभालना एक चुनौती बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले 48 घंटों में करीब 15 लाख से अधिक श्रद्धालु वाराणसी पहुंच चुके हैं। रविवार को 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के दर्शन करने की संभावना है।

काशी में श्रद्धालुओं का सैलाब

प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के बाद श्रद्धालु बड़ी संख्या में काशी पहुंच रहे हैं। सुबह मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह के पट खोले गए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भव्य श्रृंगार दर्शन किए। बाबा को दूध, दही, घी और शहद चढ़ाने के बाद आरती संपन्न हुई। हर-हर महादेव के जयघोष, शंखनाद और घड़ियालों की आवाज से पूरा परिसर गूंज उठा।

मंदिर और घाटों की ओर जाने वाली सभी सड़कें श्रद्धालुओं से भरी पड़ी हैं। गोदौलिया से लेकर दशाश्वमेध घाट और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक हर जगह लोग कतारों में खड़े हैं। मंदिर परिसर में जाने वाली कतारें तीन किलोमीटर से भी लंबी हो चुकी हैं। श्रद्धालु आधी रात से लाइन में लगे हुए हैं और पट बंद होने के बाद भी वे अगले दिन के दर्शन करने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

महाकुंभ की वजह से बढ़ी भीड़

महाकुंभ स्नान से लौटते हुए श्रद्धालु काशी में गंगा स्नान और मंदिर दर्शन के लिए रुक रहे हैं। इस दौरान बाबा विश्वनाथ धाम, कालभैरव मंदिर और अन्य प्रमुख शिवालयों में भीड़ उमड़ पड़ी है। गंगा घाटों पर भी स्नान करने वालों की संख्या में भारी इजाफा देखा गया है। काशी के प्रमुख घाटों जैसे दशाश्वमेध घाट, मान मंदिर घाट, त्रिपुर घाट और मणिकर्णिका घाट पर भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हैं।

यातायात और पार्किंग प्रबंधन की चुनौती

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन ने बाहरी वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। शहर में केवल वाराणसी में पंजीकृत वाहनों (UP-65) को प्रवेश की अनुमति दी गई है। दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले वाहनों को शहर के बाहरी हिस्सों में बने पार्किंग स्थलों पर रोका जा रहा है।संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, डीएवी कॉलेज और संत रविदास मंदिर ग्राउंड जैसे स्थलों को पार्किंग के लिए चिन्हित किया गया है। यहां से श्रद्धालुओं को ऑटो या टोटो के जरिए मंदिर और घाटों तक पहुंचने की अनुमति है।

सिर्फ UP-65 नंबर वाले वाहनों को शहर के अंदर मिलेगी एंट्री

प्रयागराज से आने वाले वाहनों को रोहनिया के पास रोका जा रहा है। इन वाहनों को जगतपुर इंटर कॉलेज के पार्किंग स्थल पर खड़ा करना अनिवार्य है। श्रद्धालु यहां से ऑटो या अन्य छोटे वाहनों का इस्तेमाल कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।गोलगड्डा तिराहा, रामकटोरा तिराहा, और कबीर मठ तिराहे जैसे प्रमुख स्थानों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। केवल स्थानीय UP-65 वाहनों को ही सीमित क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति दी गई है।

सार्वजनिक परिवहन पर असर

भीड़ के मद्देनजर शहर में नगर बस सेवा को 5 फरवरी तक स्थगित कर दिया गया है। पैडल रिक्शा और अन्य गैर-पंजीकृत वाहनों के संचालन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। चौकाघाट से लेकर लंका और रविंद्रपुरी तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है जिससे यात्रियों को परेशानी न हो।

श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी व्यवस्था

प्रशासन ने काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की हैं। यातायात पुलिस ने पार्किंग स्थलों पर विशेष इंतजाम किए हैं ताकि वाहनों की लंबी कतारों को नियंत्रित किया जा सके। मंगला आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियों के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

श्रद्धालुओं के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए प्रशासन ने सलाह दी है कि लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें। साथ ही, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ क्षेत्रों में प्रवेश पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

आने वाले दिनों में और बढ़ेगी भीड़

मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और महाकुंभ समापन तक काशी में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान करीब 10 करोड़ लोग वाराणसी आएंगे। प्रशासन ने सभी विभागों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

स्थानीय निवासियों की समस्याएं

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और यातायात प्रतिबंधों के कारण स्थानीय निवासियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के कामों के लिए लोगों को पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। दुकानदारों और व्यापारियों को भी माल आपूर्ति में दिक्कतें हो रही हैं।

समाजसेवकों और स्वयंसेवकों का योगदान

भारी भीड़ के बीच कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने राहत पहुंचाने का कार्य शुरू किया है। ये लोग श्रद्धालुओं को पानी, प्रसाद और अन्य आवश्यक चीजें मुहैया करा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर ये संगठन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं।

वाराणसी में वीकेंड पर श्रद्धालुओं की इस भीड़ ने धार्मिक आस्था और उत्साह का एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। हालांकि प्रशासन के सामने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है इसलिए बेहतर प्रबंधन और ठोस योजनाओं की आवश्यकता होगी।

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