बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी चेतावनी!: अगर वेतन में हुई कटौती तो प्रदेश में... जानें आखिर क्या हैं मामला
बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी चेतावनी!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों ने अपने वेतनमान में संभावित कटौती के विरोध में शुक्रवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन लगातार जारी है। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन द्वारा समयबद्ध वेतनमान में किसी भी प्रकार की कटौती की गई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि प्रबंधन जानबूझकर बिजली कर्मचारियों को डराने के लिए वेतनमान में कटौती की साजिश रच रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर वेतन कटौती जैसा कोई कदम उठाया गया तो कर्मचारी सख्त कार्रवाई करने को मजबूर होंगे। 
 
निजीकरण के खिलाफ जनता को किया जाएगा जागरूक

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कंपनियों के निजीकरण की साजिश के खिलाफ अब बिजलीकर्मी आम जनता के बीच जाकर जागरूकता फैलाएंगे। जनता को यह बताया जाएगा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन जानबूझकर गलत आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है ताकि निजीकरण को सही ठहराया जा सके।

हानियों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की बात करें तो वर्ष 2023-24 में यहां विद्युत हानि 25.26% दर्ज की गई थी जबकि सरकारी दस्तावेजों में इससे अधिक बताने की कोशिश की जा रही है। इसी तरह दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की वास्तविक हानि 22.75% है लेकिन दस्तावेजों में इसे 34.33% दर्शाया गया है।

वहीं पदाधिकारियों ने बताया कि 2010 में जब आगरा शहर की बिजली का संचालन टोरेंट पावर कंपनी को सौंपा गया था तब वहां की विद्युत हानि 54% बताई गई थी। वर्तमान में, सरकारी दस्तावेजों में हानियों के आंकड़े भी गलत दर्शाए जा रहे हैं।

पावर कॉरपोरेशन को हुआ भारी नुकसान

संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि टोरेंट पावर को कम दरों पर बिजली देने के कारण पावर कॉरपोरेशन को अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। वर्ष 2023-24 में ही इस कारण 275 करोड़ रुपये की हानि हुई। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल में भी निजीकरण के जरिए इसी तरह का घोटाला करने की योजना बनाई जा रही है जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत क्रेडिट कैंप का आयोजन

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत राज्य में विभिन्न मंडलों में संयुक्त क्रेडिट कैंप आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख सचिव (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) आलोक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋण वितरण से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

उन्होंने कहा कि पोर्टल पर लंबित आवेदनों की संख्या न्यूनतम होनी चाहिए और सभी जिला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वीकृत आवेदनों पर जल्द से जल्द ऋण वितरित किया जाए। इस अभियान के तहत मंडल स्तर पर भी निगरानी की जाएगी ताकि ऋण आवंटन और वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।

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