लखनऊ: शहर के मोहान रोड स्थित निर्वाण संस्था में मानसिक मंदित बच्चों की तबीयत बिगड़ने से गुरुवार को एक और बच्चे की मौत हो गई। लोकबंधु अस्पताल में भर्ती सूरज नाम के बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी के साथ इस घटना में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। कुछ बच्चे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं जबकि छह को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।
खाने के बाद बिगड़ी थी बच्चों की हालत
दरअसल शनिवार, 22 मार्च की रात संस्था में बच्चों को रोज़ की तरह खाना खिलाया गया। कुछ ही देर बाद बच्चों को पेट दर्द और उल्टियां होने लगीं। पहले तीन-चार बच्चों की हालत खराब हुई लेकिन धीरे-धीरे कई और बच्चे बीमार पड़ गए। स्थिति बिगड़ते देख संस्था प्रशासन ने 24 बच्चों को लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया जबकि बाकी 46 बच्चों का इलाज संस्था परिसर में ही किया गया।
चार दिन में चार बच्चों ने तोड़ा दम
बीमारी के चलते सोमवार को 12 साल के शिवांक की मौत हो गई थी। इसके अगले दिन मंगलवार को 15 साल की रेनू और 12 साल की दीपा का भी निधन हो गया था। अब आज गुरुवार को सूरज नाम के बच्चे ने दम तोड़ दिया। हालांकि अस्पताल में भर्ती अन्य 15 बच्चों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
अधिकारियों ने लिया जायजा
घटना के बाद गुरुवार को मंडलायुक्त रोशन जैकब और जिलाधिकारी विशाख जी लोकबंधु अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों का हाल जाना और डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली। इससे पहले बुधवार को डीएम ने संस्था का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया था। उन्होंने संस्था संचालक और कर्मचारियों से पूछताछ कर मामले की जानकारी ली।
मौत का कारण अब तक स्पष्ट नहीं
मृत बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। प्रशासन ने शवों का विसरा और हार्ट सुरक्षित रख लिया है जिनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण पता चलेगा। अभी तक डॉक्टरों को यह फूड पॉइजनिंग का मामला लग रहा है।
लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों में उल्टी, दस्त और संक्रमण के लक्षण थे इसलिए संभव है कि दूषित भोजन या पानी के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी हो।
संस्था में रह रहे थे 70 बच्चे
निर्वाण संस्था में मानसिक मंदित और निराश्रित बच्चों को आश्रय दिया जाता है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि बच्चों के बीमार होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां भेजी गई थी। संस्था में 70 बच्चे बीमार थे। इनमें से 24 की हालत गंभीर होने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया जबकि बाकी 46 बच्चों का इलाज संस्था परिसर में ही किया गया।