जानें वो मामला जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फटकार!: न्यायिक शिष्टाचार के उल्लंघन को लेकर डीएम और एसपी से मांगा जवाब वही?
जानें वो मामला जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फटकार!

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा एक न्यायिक अधिकारी के प्रति अनुचित भाषा का प्रयोग करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल गाजीपुर के प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा अधिकारिक रिपोर्ट में वहां के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) का उल्लेख औपचारिक तथा सम्मान सूचक शब्दों का प्रयोग किए बिना ही किया गया था।

आइए जानते हैं कैसे शुरू हुआ यह विवाद:

दरअसल इस मामले के अनुसार याचिका गिरीश चंद के द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ में एक याचिका दाखिल की गई थी। वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता के द्वारा पक्ष रखा गया, साथ हु राज्य सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता के द्वारा बहस की गई। 

यह विवाद तब शुरू हुआ जब गाजीपुर के जिलाधिकारी (DM) तथा पुलिस अधीक्षक समेत बंदोबस्त अधिकारी एवं रामपुर मांझा थाना प्रभारी के द्वारा एक संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें भूमि के उपयोग एवं निर्माण से संबंधित विवरण दिया गया था। 

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के द्वारा पहले ही सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गाजीपुर के द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने के दिशा निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब कोर्ट ने आधिकारिक रिपोर्ट में बिना किसी औपचारिक सम्मान सूचक शब्दों के प्रयोग न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है।

हाईकोर्ट ने DM व SP से भी मांगा व्यक्तिगत हलफनामा:

इसके साथ ही हाई कोर्ट के द्वारा डीएम (DM) समेत एसपी (SP) से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगकर मामले की पूरी सफाई मांगी है। फिलहाल इसकी अगली सुनवाई 11 मार्च को होनी है। बता दें कि यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ के द्वारा गिरीश चंद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा अन्य की याचिका पर दिया गया है।

जस्टिस मुनीर ने बताया न्यायिक शिष्टाचार का उल्लघंन:

वहीं दूसरी तरफ जस्टिस जेजे मुनीर ने प्रशासन के द्वारा सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गाजीपुर के प्रति उपयोग में लाई गई भाषा को अनुचित ठहराया तथा उन्होंने कहा है कि यह न्यायिक शिष्टाचार का बेहद गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की भाषा से ऐसा प्रतीत होता है कि जिला न्यायालय के न्यायाधीशों को प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जा रहा है, इसलिए उनके प्रति अनुचित भाषा का प्रयोग किया जा रहा है।

सम्मान सूचक शब्दों का प्रयोग न करना न्यायपालिका का असम्मान: हाईकोर्ट

इसके साथ ही अदालत के द्वारा यह भी कहा गया कि मिस अथवा सुश्री जैसे सम्मान सूचक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना न्यायपालिका के प्रति उनके असम्मान को दर्शाता है। हाई कोर्ट ने गाजीपुर के जिलाधिकारी (DM) समेत पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के अंदर ही व्यक्तिगत हलफनामा दायर करके अपनी सफाई दें।

वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिवादीगण को प्लाट संख्या 711 पर पुलिस स्टेशन बनाने की अनुमति तो दी जाती है, लेकिन प्लाट संख्या 709 पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने कुछ निर्माण कार्य को अनुमति देते हुए बाकी पर रोक लगा दी है।

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