शामली: अब जिले के बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी आम उपभोक्ताओं की तरह बिजली बिल चुकाएंगे। उन्हें भी मीटर रीडिंग के आधार पर बिल भरना होगा। ऊर्जा निगम ने निर्णय लिया है कि 31 मार्च तक सभी कर्मचारियों के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। अभी तक विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को रियायती दरों पर बिजली मिलती थी लेकिन अब यह सुविधा समाप्त कर दी गई है।
400 कार्यरत और 250 सेवानिवृत्त कर्मियों के घर लगेंगे मीटर
इस आदेश के बाद जिले के करीब 400 कार्यरत और 250 सेवानिवृत्त बिजलीकर्मियों को अब बिजली बिल में कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी। आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकारी दफ्तरों में भी स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। ऊर्जा निगम के कार्यालयों में पहले ही स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अब विभागीय कर्मचारियों के घरों में भी स्मार्ट मीटर लगने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बिजली के खपत के हिसाब से देना होगा बिल
अब तक कई अधिकारी और कर्मचारी तय शुल्क पर अधिक बिजली खर्च कर रहे थे जिससे निगम को नुकसान हो रहा था जबकि कुछ कर्मचारी फिक्स चार्ज होने का फायदा उठाकर बिजली का दुरुपयोग कर रहे थे। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनकी वास्तविक खपत का आकलन किया जाएगा और उसी हिसाब से वसूली होगी।
सभी सरकारी दफ्तरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर
ऊर्जा निगम में सबसे पहले बिजली कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। अब तक लगभग 150 कार्यालयों में यह मीटर लग चुके हैं। शामली के खेड़ीकरमू, सेकेंड सब डिवीजन, डिवीजन सेकेंड और थर्ड में भी स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए जा चुके हैं। इसके अलावा बिजलीघरों में भी स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं जहां पहले कूलर, पंखे और हीटर बिना रोक-टोक चलते थे।
अब पुलिस विभाग, शिक्षा भवन, विकास भवन और अन्य सरकारी विभागों में भी स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इससे न केवल बिजली की फिजूलखर्ची रुकेगी बल्कि राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
राजस्व वृद्धि के लिए उठाया कदम
ऊर्जा निगम के चेयरमैन आशीष गोयल ने हाल ही में लखनऊ में अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर कार्रवाई होगी। इसके बाद जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेज कर दिया गया है।
बिजली कर्मचारियों को देना होगा पूरा बिल
अब बिजली विभाग के कर्मचारियों को भी स्मार्ट मीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा। पहले तय शुल्क के तहत वे कम कीमत पर बिजली इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन अब उन्हें आम उपभोक्ताओं की तरह ही पूरा बिल देना होगा।
कर्मचारी अब तक इतना दे रहे थे बिल
पद : तय शुल्क : AC शुल्क : कुल
मुख्य अभियंता : 1628 : 650 : 2278
अधीक्षण अभियंता : 1628 : 650 : 2278
एक्सईएन : 1194 : 650 : 1844
एसडीओ : 1092 : 650 : 1742
लिपिक : 840 : 650 : 1490
कर्मचारियों ने इस फैसले का किया विरोध
बिजली कर्मचारियों ने इस फैसले का विरोध किया है। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन के जिला सचिव अजय शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा दी जाने वाली रियायत खत्म करना गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।