राज्य महिला आयोग का बड़ा फैसला!: महिला ग्राम प्रधानों की जगह शासन करने वाले पतियों और परिवार वालों की अब खैर नहीं, बिना अनुमति लिए गए फैसलों….?
राज्य महिला आयोग का बड़ा फैसला!

आगरा: प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य महिला आयोग ने एक नया निर्णय लिया है जिसके तहत अब किसी भी सरकारी बैठक में महिला जनप्रतिनिधियों के पति या किसी अन्य रिश्तेदार को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी महिला जनप्रतिनिधि को कार्य संबंधी जानकारी नहीं है तो उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा लेकिन बिना उनकी अनुमति के कोई भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। यह निर्देश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को दिए है।

महिला ग्राम प्रधानों को करने होंगे ये काम?

मंगलवार को नवीन सर्किट हाउस में आयोजित जनसुनवाई में बबीता चौहान ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी बैठक में महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति या कोई अन्य रिश्तेदार उपस्थित नहीं हो सकते। सभी बैठकों में महिला प्रतिनिधियों को स्वयं भाग लेना अनिवार्य होगा। उन्होंने जिले में महिला ग्राम प्रधानों की संख्या का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां कुल 280 महिला ग्राम प्रधान हैं। अक्सर देखा गया है कि उनके पति या अन्य पारिवारिक सदस्य बैठकों में शामिल हो जाते हैं लेकिन अब इस पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।

बबीता चौहान ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सरकारी बैठकों में केवल महिला जनप्रतिनिधि ही शामिल हों। इसके अलावा यदि किसी महिला प्रतिनिधि को सरकारी योजनाओं, कार्य प्रणालियों और नियमावली की जानकारी नहीं है तो उनके लिए प्रशिक्षण सत्र, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से समझ सकें और प्रभावी रूप से कार्य कर सकें।

कैसा रहा है राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का करियर?

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का राजनीतिक करियर भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने खेरागढ़ से जिला पंचायत सदस्य के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की। ठाकुर बहुल्य क्षेत्र से सदस्य बनने के बाद उन्होंने पार्टी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डॉ. मंजू भदौरिया को अध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया। इसके साथ ही उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और 2022 के विधानसभा चुनाव में टूंडला विधानसभा क्षेत्र की प्रभारी रहीं। 2023 में उन्होंने शिकोहाबाद नगर पालिका चुनाव में भी अहम भूमिका निभाई।

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लिया गया फैसला

बबीता चौहान का मानना है कि महिला जनप्रतिनिधियों के वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग भी एक गंभीर समस्या है। अक्सर देखने में आया है कि महिला प्रतिनिधियों का चयन तो जनता करती है लेकिन उनके पति या अन्य रिश्तेदार वित्तीय फैसलों में दखल देकर अनियमितताएं करते हैं जिससे भ्रष्टाचार और हेराफेरी की घटनाएं सामने आती हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि महिला जनप्रतिनिधि पूरी तरह स्वतंत्र होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

अन्य खबरे