यूपी में कांग्रेस का बड़ा दांव!: निष्क्रिय नेताओं की होगी छुट्टी वही टिकट तय करने में जिलाध्यक्षों की बढ़ेगी पावर, होगी विशेष भूमिका? 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी...
यूपी में कांग्रेस का बड़ा दांव!

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी अब खुद को सिर्फ चेहरों की अदला-बदली तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे को बदलने की दिशा में बड़ी पहल कर रही है। खासकर उत्तर प्रदेश में पार्टी ने ठान लिया है कि ज़मीन से जुड़े नेताओं को अब सिर्फ दिखावे का हिस्सा नहीं बल्कि असली निर्णय लेने की ताकत दी जाएगी।

अब जिलाध्यक्ष तय करेगा किसे मिले टिकट?

अब तक चुनावी टिकट बांटने का फैसला आलाकमान करता था, लेकिन अब जिलाध्यक्षों की राय अहम होगी। यानी हर जिले का नेता अब सिर्फ पोस्टर में चेहरा नहीं रहेगा बल्कि टिकट तय करने में उसकी बात सुनी जाएगी। यह बदलाव कांग्रेस के काम करने के तरीके में बड़ा मोड़ है।

दिल्ली में हुई नेताओं की खास बैठक

दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के 134 जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्ष शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में संगठन को लेकर कई ठोस निर्णय लिए गए। बैठक का फोकस साफ था  अब संगठन ऊपर से नहीं, नीचे से ताकतवर बनेगा।

जिलाध्यक्षों की बढ़ाई जाएगी ताकत

पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बताया कि अब DCC को ज्यादा आज़ादी दी जाएगी। वे खुद फैसले ले सकेंगे आर्थिक तौर पर मज़बूत किए जाएंगे और AICC व PCC के कार्यक्रमों को खुद अपने ज़िले में लागू कर पाएंगे। ये फैसला पार्टी के पुराने ढांचे को झकझोरने वाला है।

सिर्फ काम करने वाले ही आगे बढ़ेंगे

राहुल गांधी ने साफ कर दिया जो नेता सिर्फ नाम के लिए पार्टी में हैं और न काम करते हैं, न बैठकों में आते हैं उनकी अब पार्टी में जगह नहीं रहेगी। अब वही आगे बढ़ेगा जो ज़मीन पर मेहनत करेगा। उन्होंने कहा, “आपको अब पावर दी जा रही है लेकिन ज़िम्मेदारी भी उतनी ही होगी।”

अब DCC नेताओं का परफॉर्मेंस भी मॉनिटर किया जाएगा कि कौन कितनी सक्रियता दिखा रहा है, कितनी वोटिंग बढ़ी, कितने कार्यक्रम किए गए, इन सबका डाटा रखा जाएगा। इसी से तय होगा कि कौन बनेगा भविष्य का नेता।

जो संकट के समय भी पार्टी के साथ रहे वही सच्चे सिपाही है: खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो सत्ता के समय तो पार्टी में रहते हैं लेकिन संकट में गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता आज भी ज़मीन पर डटे हैं वही कांग्रेस के असली सिपाही हैं।

गठबंधन पर ली गई राय

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कितना फायदेमंद रहा इस पर भी जिलाध्यक्षों से राय मांगी गई। कई नेताओं ने कहा कि पूर्व विधायक और पदाधिकारी संगठन के काम में ज़रूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करते हैं। इस पर राहुल गांधी ने भरोसा दिलाया कि अब AICC इस पर निगरानी रखेगी।

सोशल मीडिया पर उठाई जाएगी आवाज

बैठक में सोशल मीडिया की अहमियत पर खास जोर दिया गया। जिलाध्यक्षों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेनिंग दी गई ताकि वो ऑनलाइन भी पार्टी की आवाज़ मज़बूती से उठा सकें। भविष्य में जिला स्तर पर भी सोशल मीडिया की ज़िम्मेदारी बढ़ेगी।

संपत्तियों का हो बेहतर इस्तेमाल

बैठक में यह भी पूछा गया कि पार्टी की संपत्तियों का ज़िलों में कैसे इस्तेमाल हो रहा है? सुझाव मांगे गए कि कैसे इनका प्रयोग संगठन को और मजबूत बनाने में किया जा सकता है।

अहमदाबाद अधिवेशन में तय आगे की रणनीति

8 अप्रैल को अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में कांग्रेस संगठन के इस नए मॉडल को औपचारिक रूप दिया जाएगा। वहां तय होगा कि जिलाध्यक्षों को किस हद तक अधिकार मिलेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि ये कांग्रेस की नई शुरुआत है जिसमें संगठन को नीचे से मजबूत बनाया जाएगा।

2027 का लक्ष्य अभी से तय

बैठक के अंत में राहुल गांधी ने साफ कहा  “अब वक्त आ गया है कि गुटबाज़ी छोड़ें, संगठन को बूथ स्तर तक ले जाएं और 2027 के विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर पूरी ताकत से जुट जाएं।”

कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी अब जमीनी नेतृत्व को ताकत देने, संगठन को नीचे से ऊपर तक मजबूत करने और निष्क्रियता को दरकिनार करने की दिशा में एक नया अध्याय शुरू कर रही है।

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