क्या सच में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के लिए खतरनाक साबित होगा स्टारलिंक!: जानें जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट, क्या सच में एलन मस्क पेश करे पाएंगे जियो-एयरटेल के सामने चुनौती?
क्या सच में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के लिए खतरनाक साबित होगा स्टारलिंक!

टेक्नोलॉजी: जेएम फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के अनुसार एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारतीय टेलीकॉम कंपनियों जियो और एयरटेल के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं बनेगी। इसकी वजह यह है कि भारतीय कंपनियां बेहद किफायती दामों पर बेहतर इंटरनेट स्पीड और अनलिमिटेड डेटा उपलब्ध कराती हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

स्टारलिंक का महंगा प्लान बनेगा बाधा

दुनिया भर में स्टारलिंक और अन्य सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की कीमत 10 डॉलर (करीब 869 रुपये) से लेकर 500 डॉलर (करीब 43,474 रुपये) तक होती है। इसके अलावा हार्डवेयर खरीदने के लिए भी 26,000 रुपये से 3.3 लाख रुपये तक का एकमुश्त खर्च आता है। इसके मुकाबले भारत में जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां केवल 434 रुपये से 608 रुपये प्रति माह में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड प्लान देती हैं। यहां तक कि 1 जीबीपीएस स्पीड और प्रीमियम स्ट्रीमिंग सेवाओं वाला प्लान भी 4,000 रुपये प्रतिमाह में मिल जाता है।

शहरी इलाकों में स्टारलिंक का टिकना मुश्किल

भारत में इंटरनेट सेवाओं का बाजार काफी किफायती और मूल्य-संवेदनशील है। यही कारण है कि स्टारलिंक की महंगी सेवाएं और सीमित स्पीड इसे शहरी उपभोक्ताओं के लिए कम आकर्षक बनाती हैं। जियो और एयरटेल पहले से ही फाइबर और एयरफाइबर टेक्नोलॉजी के जरिए बेहतरीन ब्रॉडबैंड सेवाएं दे रहे हैं जो शहरी ग्राहकों के लिए अधिक उपयुक्त हैं। इसलिए स्टारलिंक मुख्य रूप से ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा।

भारतीय कंपनियों के लिए सहायक बनेगा स्टारलिंक

स्टारलिंक के पास फिलहाल 6,400 से अधिक लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स हैं जिससे यह बेहतर कवरेज और कनेक्टिविटी प्रदान कर सकता है। लेकिन यह भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के लिए सीधी प्रतिस्पर्धा देने के बजाय एक सहयोगी की भूमिका निभाएगा। जियो और एयरटेल पहले ही स्पेसएक्स के साथ साझेदारी कर चुके हैं जिससे वे अपने कवरेज को और अधिक विस्तारित कर सकते हैं। कुल मिलाकर स्टारलिंक भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के लिए खतरा नहीं बल्कि दूरदराज वाले इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में सहयोगी की भूमिका निभाएगा।

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