ऑटोमोबाइल: दुनियाभर में लोग पुराने दौर की बेहतरीन कारों और स्कूटर्स का शौक रखते हैं। भारत के लोग भी इस शौक को रखने में किसी से पीछे नहीं हैं। हाल ही में 21 गन सेल्यूट कॉन्कोर्स डे एलिगेंस की ओर से दिल्ली एनसीआर में Vintage Cars के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसका समापन हो गया है। इस दौरान 35 देशों से आए ऑटो एक्सपर्ट्स ने यहां आई कारों का मुआयना किया और 100 साल पुरानी एक रोल्स रॉयस को विंटेज कार के खिताब से नवाजा।
125 से ज्यादा कारों ने की शिरकत
यह मेला में न केवल दिल्ली बल्कि भारत और पूरी दुनिया के विटेंज कारों और बाइक्स के शौकीनों के लिए एक खास उत्सव की तरह था। इस आयोजन में 125 से ज्यादा विंटेज और क्लासिक कारों के साथ ही कई मोटरसाइकिल और स्कूटर को भी शोकेस किया गया। इनमें कुछ ऐसे मॉडल्स भी शामिल हुए जो भारत के साथ ही दुनियाभर में भी बेहद कम संख्या में रह गए हैं।
100 साल पुरानी कार को मिला खिताब
इस कार्यक्रम के दौरान देशभर से कई कारों को कई परीक्षाओं को से गुजरना पड़ा और अंत में 100 साल से ज्यादा पुरानी रोल्स रॉयस गाड़ी को इस संस्करण का विजेता चुना गया। मयूरभंज रियासत की 1892 की Rolls Royce Silver Ghost कार को विजेता बनाया गया। गाड़ी के मालिक धनराज गिडवानी ने बताया कि यह कार उनके पास सन 1992 से है और यह उनके लिए काफी मायने रखती है।
शोकेस हुई बड़े बड़े ब्रांड की कारें
इस आयोजन में प्रदर्शित की जाने वाली कारों में रेंज रोवर, मर्सिडीज, बेंटली, फोर्ड, MG और कई और ब्रांड्स की विंटेज कारें शामिल हुईं। इन कारों का हर एक हिस्सा, हर एक डिजाइन सालों पहले की तकनीक को दिखाती हैं। यह आयोजन न केवल कार प्रेमियों के लिए बल्कि उन लोगों के लिए भी एक अद्भुत अनुभव रहा जो मोटरिंग की इतिहास और संस्कृति में रुचि रखते हैं।
ऑटोमोबाइल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
इस मेले की खासियत यह रही कि यहां न केवल विंटेज कारों की भव्यता देखने को मिली बल्कि संगीत, पारंपरिक परिधान, विशिष्ट कला-संस्कृति, स्वादिष्ट व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से एक समृद्ध ऐतिहासिक उत्सव भी आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय राजसी विरासत, ऐतिहासिक मोटरिंग और आधुनिक क्लासिक कारों के प्रति बढ़ती रुचि का बेहतरीन समागम साबित हुआ। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस मेले ने न केवल हेरिटेज टूरिज्म को प्रोत्साहित किया बल्कि ऑटोमोबाइल संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम रखा।