अंतरिक्ष: नासा ने अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स तथा बुच विलमोर को वापस धरती पर लाने के लिए लगभग पूरी तैयारी कर ली है। दरअसल नासा के द्वारा दोनों के वापसी को लेकर एक बड़ा अपडेट दिया गया है।
बता दें कि पिछले 9 महीनों से ISS यानि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फंसे दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अब 19 मार्च की तारीख को सफलतापूर्वक वापस धरती पर लाया जाएगा।
Crew Dragaon कैप्सूल के माध्यम से वापसी करेंगे दोनों अंतरिक्ष यात्री:
आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को स्पेसएक्स के द्वारा Crew-10 मिशन लॉन्च किया गया था। इसके अंतर्गत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragaon नामक कैप्शूल को लॉन्च किया गया था। यह NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के अंतर्गत ISS के लिए ग्यारहवीं क्रू फ्लाइट है।
गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स तथा बुच विल्मोर को मार्च 2025 के अंत तक धरती पर वापस आना था, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा एलन मस्क से उन्हें जल्दी वापस लाने का आग्रह करने के पश्चात इस मिशन में काफी तेजी लाई गई।
आखिर कहां उतरेगा SpaceX का यह कैप्सूल?
रविवार की शाम को नासा के द्वारा दिए गए एक बयान में यह कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्री 19 मार्च यानि बुधवार को धरती पर वापसी करेंगे। वहीं नासा ने बताया है कि इन दोनों यात्रियों को फ्लोरिडा तट उतरने की उम्मीद जताई जा रही है। आपको बता दें कि नासा वापसी की लाइव कवरेज भी टेलीकास्ट करने जा रहा है।
दरअसल इस लाइव कवरेज की शुरुआत ड्रैगन अंतरिक्ष यान के हैच को बंद करने की तैयारी से शुरू होगी। साथ ही नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग तथा रोस्कोस्मोस यानि रूस के अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी इस ड्रैगन कैप्सूल से वापस आएंगे।
क्या कारण था कि ISS में रुकना पड़ा 9 महीने?
सुनीता विलियम्स तथा बुच विल्मर पिछले साल 5 जून को ISS यानि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए थे। हालांकि उन्हें महज 1 हफ्ते के भीतर ही धरती पर वापस लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में कुछ गड़बड़ी आ जाने की वजह से दोनों अंतरिक्ष यात्री वहां फंस गए थे। वहीं अब 9 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद दोनों को वापस धरती पर लाया जाएगा।
ISS पर सुनीता विलियम्स ने क्या किया इतने दिनों तक:
दरअसल स्पेस में रहते हुए सुनीता विलियम्स के द्वारा कई अहम रिसर्च एक्सपेरिमेंट भी किए गए। उन्होंने 900 घंटों से अधिक का समय रिसर्च में बिताया। अपने मिशन के दौरान ही उन्होंने बोइंग स्टारलाइनर को उड़ाने का काम भी किया, जिसे उन्होंने खुद बनाने में मदद भी की थी।
इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर भी उन्होंने कई चीजों को बदला, वहां सफाई की तथा बहुत सा कचरा जमीन पर वापस भेजने में भी मदद की है।
अमेरिकन नेवी से की थी अपने करियर की शुरुआत:
साल 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से ग्रेजुएट होने के पश्चात वह अमेरिकन नेवी में शामिल हुईं। नौसेना में उन्हें हेलीकॉप्टर पायलट के तौर पर ट्रेनिंग दी गई। फिर उन्होंने पर्सियन गल्फ अर्थात फारस की खाड़ी एवं अन्य मिशनों में बतौर हेलीकॉप्टर पायलट सेवाएं भी दीं।
साल 1993 से लेकर डाल 1994 उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स नेवल टेस्ट पायलट स्कूल में भेजा गया। यहां पर उन्होंने एडवांस एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टरों की टेस्टिंग ली क्योंकि टेस्ट पायलट बनना NASA में जाने का एक बेहद महत्वपूर्ण कदम था। NASA अक्सर ऐसे लोगों को ही चुनता है जो एडवांस एयरक्राफ्ट को टेस्ट करने में काफी माहिर होते हैं।
टेस्ट पायलट में एक्सपीरियंस होने के कारण NASA में सिलेक्ट हुई:
साल 1998 में जब नासा के द्वारा नए एस्ट्रोनॉट्स यानी अंतरिक्ष यात्रियों हेतु एप्लिकेशन मांगे गए तो सुनीता विलियम्स के द्वारा भी अप्लाई किया गया। उनके बेहतह एकेडमिक रिकॉर्ड, नौसेना में बेहतरीन सेवा तथा टेस्ट पायलट के रूप में उनका एक्सपरीयंस्ड होना इस चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ाया।
वहीं हजारों एप्लिकेंट्स में से NASA सिर्फ कुछ गिने चुने लोगों का सिलेक्शन करता है। सुनीता को कई मेंटल, फिजिकल तथा साइंटिफिक टेस्ट से गुजरना पड़ा। फिर इंटरव्यू तथा मेडिकल टेस्ट हुआ। इसके पश्चात उन्हें साल 1998 में आधिकारिक रूप से नासा के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया।
साल 2006 में पहली बार की अंतरिक्ष की यात्रा:
वहीं एस्ट्रोनॉट्स प्रोग्राम में शामिल करने के पश्चात सुनीता को स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशन्स, रोबोटिक्स, स्पेसवॉक (EVA) तथा साइंटिफिक रिसर्च का गहन प्रशिक्षण भी दिया गया। फिर उनको रूसी 'सोयुज' स्पेसक्राफ्ट तथा 'इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)' के मॉड्यूल्स की भी ट्रेनिंग दी गई।
इसके पश्चात पानी के भीतर जीरो ग्रैविटी स्पेसवॉक ट्रेनिंग समेत जंगल में सर्वाइवल ट्रेनिंग तथा साइंटिफिक रिसर्च की ट्रेनिंग दी गई। आखिरकार 9 दिसंबर, 2006 को मिशन STS-116 के अंतर्गत सुनीता विलियम्स के द्वारा पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा की गई। इस मिशन में उन्होंने 192 दिन अंतरिक्ष में बिताए तथा कई स्पेसवॉक भी किए।
NASA के चंद्रमा मिशन के लिए हुई सिलेक्ट:
साल 2021 में उन्हें Boeing Starliner Crew Flight Test मिशन के लिए भी चुना गया। वहीं NASA के आर्टेमिस मिशन यानि चंद्रमा मिशन के अंतर्गत चंद्रमा पर जाने वाले संभावित अंतरिक्ष यात्रियों में भी उनका नाम शामिल किया है। वह नासा के नए 'ऑर्बिटल फ्लाइट टेस्ट-2 (OFT-2) मिशन' का हिस्सा भी हो सकती हैं।
कई पुरस्कारों से सम्मानित हुई हैं सुनीता विलियम्स:
साल 2008 में भारत सरकार के द्वारा 'साइंस एंड इंजीनियरिंग' क्षेत्र में योगदान के लिए उनको देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया।
साल 2007 में सिख समुदाय के द्वारा उनको ‘श्री साहिब’ उपाधि से सम्मानित किया गया।
साल 2012 में रूस के द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों में योगदान देने के लिए 'ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप' सम्मान दिया गया।
साल 2007 में गुजरात सरकार के द्वारा उनको 'गुजरात गौरव पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
साल 2008 में IIT कानपुर के द्वारा उनको 'डॉक्टर ऑफ साइंस' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।