नोएडा में 3500 करोड़ के क्लाउड पार्टिकल स्कैम का पर्दाफाश!: फर्जी एमओयू के सहारे निवेशकों को ठग विदेश भेजे रूपए वही ED ने किया मास्टरमाइंड को गिरफ्तार?
नोएडा में 3500 करोड़ के क्लाउड पार्टिकल स्कैम का पर्दाफाश!

नोएडा: शहर में बैठे ठगों ने डेटा सेंटर खोलने के नाम पर 3,500 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस स्कैम का मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरोर और उसकी पत्नी हैं जो अब ED की गिरफ्त में हैं। इस फर्जीवाड़े की नींव 750 डेटा सेंटर बनाने के एक फर्जी एमओयू के जरिए रखी गई थी। ED ने इस मामले में बीते साल 24 नवंबर को नोएडा के सेक्टर-58 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

नोएडा के सेक्टर-62 में बनाया था फर्जी ऑफिस

इस घोटाले को अंजाम देने वाली कंपनी "व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विस" का ऑफिस नोएडा के सेक्टर-62 स्थित आईथम टावर की आठवीं मंजिल पर था। जांच के दौरान ED को पता चला कि इस कंपनी के साथ-साथ जेबाइट इनफोटेक प्राइवेट लिमिटेड और जेबाइट रेंटल प्लेनेट प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां भी इस घोटाले में शामिल थीं। सुखविंदर सिंह विदेश भागने की कोशिश में था लेकिन ED की जालंधर यूनिट ने उसे एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया।

13,500 करोड़ रुपये के निवेश का दिया झांसा

घोटालेबाजों ने दावा किया था कि वे उत्तर प्रदेश में 750 डेटा सेंटर खोलेंगे जिनमें कुल 13,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस भरोसे के दम पर इन्होंने हजारों निवेशकों से पैसे ऐंठ लिए। ED ने इस मामले की जांच अक्टूबर 2023 में शुरू की और नवंबर 2024 में केस दर्ज किया गया।

सिर्फ 2 अकाउंट से मिले 2236 करोड़ रुपए

ED की जांच में सामने आया कि 2016 से 2023 के बीच व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विस का रेवेन्यू 533 करोड़ रुपये से ज्यादा था। इसके अलावा कंपनी के दो बैंक अकाउंट्स में 2,236 करोड़ रुपये जमा मिले। ये सारे पैसे निवेशकों से क्लाउड पार्टिकल बेचने के नाम पर इकट्ठा किए गए थे। हर क्लाउड पार्टिकल की कीमत 41,000 रुपये रखी गई थी।

कंपनी की क्षमता से कई गुना ज्यादा बेचे गए सर्वर

ED की रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि कंपनी की असली क्षमता सिर्फ 2,701 TB की थी लेकिन जांच करने वाली टीम को मिले दो डेटा के अनुसार एक में 1 लाख 29 हजार से अधिक पार्टिकल और बैंक डिटेल के अनुसार 5 लाख 42 हजार पार्टिकल को बेचा गया था। जिसके बाद माना गया कि कंपनी जो सेल और लीज बैक मॉडल का प्रयोग कर रही थी उससे लोगों को निवेश के नाम पर ठगा जा रहा था। जिसमें मूल कंपनी से दूसरी कंपनियों को रुपये ट्रांसफर किए जा रहे थे। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सभी तथ्यों की जांच शुरू हुई।

यूपी सरकार के साथ हुए एमओयू को दिखाकर लोगों को ठगा

सुखविंदर सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हुए एमओयू का फायदा उठाकर भरोसा दिलाया कि यह एक असली प्रोजेक्ट है। लोगों को बताया गया कि वे डेटा सेंटर की स्टोरेज क्षमता का छोटा-छोटा हिस्सा खरीद सकते हैं और उसे किराए पर देकर कमाई कर सकते हैं। इसी लालच में हजारों लोगों ने करोड़ों रुपये इस स्कीम में डाल दिए। लेकिन असल में इन पैसों को डेटा सेंटर में लगाने की बजाय विदेश भेज दिया गया।

झूठे कागजातों से बढ़ाई कंपनी की वैल्यू

कंपनी की फाइनेंशियल हैसियत कागजों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें पैसा लगाएं। लेकिन जब ED ने जांच शुरू की तो सारा खेल खुल गया। अब ED यह पता लगाने में जुटी है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल था और ठगे गए लोगों का पैसा कैसे वापस लाया जाए।

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