नई दिल्ली: आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे इसे चर्चा के लिए सदन में रखेंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे निर्धारित किए हैं। जिसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट मिलेंगे जबकि शेष समय विपक्ष को दिया जाएगा।तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने विधेयक के समर्थन की घोषणा की है और अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
वहीं विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। तमिलनाडु की AIADMK, बीजू जनता दल (BJD) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) जैसी न्यूट्रल पार्टियां भी विपक्ष के साथ खड़ी हैं। I.N.D.I.A ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन में बैठक कर इस बिल को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की। विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की है जिस पर किरेन रिजिजू ने कहा कि समय बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है ताकि देश को पता चले कि किस पार्टी का क्या रुख है।
चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं कि वक्फ संशोधन विधेयक क्या है और इसमें क्या-क्या बदलाव किए गए हैं:
8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो विधेयक वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ निरसन विधेयक, 2024 पेश किए गए। इनका उद्देश्य वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित करना और वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। वक्फ विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है। ताकि, वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का मकसद देश में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है।
वक्फ संशोधन विधेयक के 5 मुख्य उद्देश्य
1. पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना
2. अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना
3. वक्फ की परिभाषाओं को एक तरह से अपडेट करना
4. पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करना
5. वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाना
कैसे काम करता है वक्फ?
भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन वर्तमान में वक्फ अधिनियम, 1995 से शासित है। इसे केंद्र सरकार की ओर से अधिनियमित और विनियमित किया जाता है। यह प्रणाली बेहतर प्रबंधन और मुद्दों के तेज समाधान को सुनिश्चित करती है। पिछले कुछ वर्षों में कानूनी बदलावों ने वक्फ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बना दिया है।
इसके मुख्य प्रशासनिक निकाय
भारत में वक्फ संपत्तियों का संचालन मुख्य रूप से तीन संस्थानों द्वारा नियंत्रित किया जाता है:
1. केंद्रीय वक्फ परिषद – यह सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति संबंधी सुझाव देती है लेकिन सीधे वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन नहीं करती।
2. राज्य वक्फ बोर्ड – यह प्रत्येक राज्य में वक्फ संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन का कार्य करता है।
3. वक्फ न्यायाधिकरण – वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों के समाधान हेतु एक विशिष्ट न्यायिक निकाय।
वक्फ बोर्ड से जुड़े प्रमुख मुद्दे:
1. वक्फ संपत्तियों की स्थायित्वता: 'एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ' के सिद्धांत ने विवाद उत्पन्न किए हैं, जैसे बेट द्वारका द्वीप पर दावे, जिन्हें अदालतों ने भी जटिल माना है।
2. कानूनी विवाद और कुप्रबंधन: वक्फ अधिनियम, 1995 और 2013 के संशोधन प्रभावी नहीं रहे हैं। वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा, कुप्रबंधन, स्वामित्व विवाद, पंजीकरण में देरी, लंबित सर्वेक्षण, और बड़े पैमाने पर कानूनी मुकदमे इसके प्रमुख मुद्दे हैं।
3. न्यायिक निगरानी का अभाव: वक्फ न्यायाधिकरणों के निर्णय उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दिए जा सकते, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में कमी आती है।
4. अधूरा वक्फ संपत्ति सर्वेक्षण: सर्वेक्षण कार्य धीमा और अव्यवस्थित रहा है। गुजरात और उत्तराखंड में अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी अधूरा है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ समन्वय की समस्या के कारण प्रक्रिया बाधित हुई है।
5. वक्फ कानूनों का दुरुपयोग: कुछ राज्य वक्फ बोर्डों पर अपने अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, जिससे सामुदायिक तनाव बढ़ा है। वक्फ अधिनियम की धारा 40 के तहत निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के कई विवादास्पद मामले सामने आए हैं। 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से केवल 8 ने डेटा दिया है, जिसमें 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है।
6. वक्फ अधिनियम की संवैधानिकता पर सवाल: यह कानून केवल एक धर्म के लिए लागू है, जबकि अन्य धर्मों के लिए ऐसा कोई समान प्रावधान नहीं है जिससे इसकी संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम संवैधानिक है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
विगत कुछ वर्षों में वक्फ संपत्तियों के संचालन में कई जटिलताएँ उत्पन्न हुई हैं। जिनमें अवैध कब्जा, पंजीकरण की कठिनाइयाँ, पारदर्शिता की कमी और वक्फ बोर्डों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा वक्फ अधिनियम केवल मुस्लिम समुदाय पर लागू होता है जबकि अन्य धार्मिक संपत्तियों के लिए कोई समान कानूनी प्रावधान नहीं है। इन खामियों को दूर करने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया गया है।
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 में किए जाने वाले बदलाव?
वक्फ एक्ट में 3 कैटेगरी में कुल 14 बड़े बदलाव किए जा रहे है।
कैटेगरी १: वक्फ बोर्ड के स्ट्रक्चर में बदलाव
1- आर्टिकल 9 और 14 में बदलाव कर 2 महिला मेंबर शामिल होंगी।
2- गैर-मुस्लिम मेंबर शामिल होंगे।
3- शिया सुन्नी सहित पिछड़े मुस्लिम समुदायों से भी मेंबर होंगे।
4- बोहरा और अगखानी मुस्लिम समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनेगा।
5- केंद्र सरकार सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 3 सांसदों (लोकसभा से 2, राज्यसभा से 1) को रख सकेगी, जरूरी नहीं कि वे मुस्लिम हों अब तक तीनों सांसद मुस्लिम होते थे।
कैटेगरी २: वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी पर नियंत्रण
6- CAG या सरकार की तरफ से नियुक्त ऑडिटर वक्फ प्रॉपर्टी का ऑडिट करेंगे।
7- राज्य सरकार, प्रॉपर्टीज के सर्वे के लिए सर्वे कमिश्नर की जगह जिला कलेक्टर को नियुक्त करेगी।
8- बोर्ड को अपनी प्रॉपर्टी जिला कलेक्टर के ऑफिस में रजिस्टर करानी होगी।
9- कलेक्टर किसी वक्फ प्रॉपर्टी को सरकारी संपत्ति मानता है, तो उसे राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करवा कर राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट देनी होगी।
10- जब तक कलेक्टर किसी विवादित प्रॉपर्टी पर रिपोर्ट नहीं देते, उसे वक्फ प्रॉपर्टी नहीं माना जाएगा। यानी सरकार के फैसला न लेने तक प्रॉपर्टी को वक्फ बोर्ड कंट्रोल नहीं कर सकेगा।
11- बिना कागजात के कोई संपत्ति वक्फ नहीं मानी जाएगी। मसलन, मस्जिदें वक्फनामे के बिना भी वक्फ की संपत्ति होती थीं, अब ऐसा नहीं होगा।
कैटेगरी ३: वक्फ की विवादित प्रॉपर्टी का निपटारा
12- धारा-40 खत्म होगी। इसके तहत वक्फ को किसी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित करने का अधिकार था।
13- वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। अभी तक वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को सिविल, राजस्व या दूसरी अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
14- नए कानून के बनने से पहले या बाद में, किसी सरकारी संपत्ति को वक्फ की प्रॉपर्टी घोषित किया गया है, तो अब वह वक्फ प्रॉपर्टी नहीं होगी।
2024 में पेश किया वक्फ संशोधन विधेयक
इस विधेयक के तहत प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करके देश में वक्फ प्रशासन में बदलाव लाना है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक सुव्यवस्थित, प्रौद्योगिकी-संचालित और कानूनी रूप से मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करना है और साथ ही लक्षित लाभार्थियों के लिए सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
वक्फ संपत्तियों को प्रभावित करने वाले कई मुद्दे हैं। इनमें वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वे, ट्रिब्यूनल और वक्फ बोर्डों में मुकदमों का काफी बैकलॉग, लेखा परीक्षा व निगरानी, मुतवल्लियों का अनुचित लेखाऔर सभी वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन ठीक से नहीं किया गया है। प्रतिनिधित्व और दक्षता बढ़ाने के लिए निर्णय लेने में गैर-मुस्लिम, अन्य मुस्लिम समुदायों, मुस्लिम समुदायों के बीच अन्य पिछड़े वर्गों और महिलाओं आदि जैसे विविध समूहों को शामिल करना प्रमुख सुधार है।
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं जो निम्न है…
1. वक्फ और ट्रस्टों का विभाजन: अब मुसलमानों द्वारा स्थापित किसी भी ट्रस्ट को वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा, जिससे ट्रस्टों का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
2. केंद्रीय पोर्टल और प्रौद्योगिकी का समावेश: वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, लेखा परीक्षण, योगदान और मुकदमेबाजी को एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। यह वक्फ प्रबंधन के स्वचालन के लिए प्रौद्योगिकी का कुशलतापूर्वक उपयोग भी करता है।
3. वक्फ समर्पण की पात्रता: केवल वे मुसलमान जो न्यूनतम पाँच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे हैं अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकेंगे। जो 2013 से पहले के प्रावधान को बहाल करता है।
4. वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा: पहले से पंजीकृत संपत्तियाँ तब तक वक्फ मानी जाएंगी जब तक कि उन पर कोई विवाद न हो या उन्हें सरकारी भूमि के रूप में चिह्नित न किया जाए।
5. महिलाओं के अधिकारों की रक्षा: पारिवारिक वक्फ में महिलाओं को उचित विरासत प्राप्त होगी। जिसमें विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए विशेष प्रावधान होंगे।
6. पारदर्शी वक्फ प्रबंधन: जवाबदेही बढ़ाने के लिए मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर संपत्ति का विवरण दर्ज करना होगा।
7. सरकारी भूमि और वक्फ विवाद: कलेक्टर के पद से ऊपर का एक अधिकारी वक्फ के रूप में दावा की गई सरकारी संपत्तियों की जांच करेगा, जिससे अनुचित दावों को रोका जा सकेगा।
8. वक्फ न्यायाधिकरणों को मजबूत करना: एक संरचित चयन प्रक्रिया और निश्चित कार्यकाल विवाद समाधान में स्थिरता और दक्षता सुनिश्चित करता है।
9. गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व: केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिससे निर्णय-प्रक्रिया में समावेशिता बढ़ेगी।
10. अनिवार्य योगदान में कमी: वक्फ संस्थानों का अनिवार्य योगदान 7% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे परोपकारी कार्यों के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा।
11. परिसीमा अधिनियम लागू करना: अब वक्फ संपत्तियों के दावों पर परिसीमा अधिनियम, 1963 लागू होगा। जिससे अनावश्यक मुकदमेबाजी में कमी आएगी।
12. लेखा परीक्षण में सुधार: 1 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाली वक्फ संस्थाओं को राज्य सरकार द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षकों से लेखा परीक्षण कराना होगा।
13. धारा 40 का निष्कासन: अब वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को मनमाने ढंग से वक्फ घोषित नहीं कर सकेंगे। जिससे निजी संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण पर रोक लगेगी।
क्यों हो रहा है विधेयक का विरोध?
विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं। विरोध के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
1. धारा 40 की समाप्ति: कुछ समूहों का मानना है कि इससे वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने में बाधा उत्पन्न होगी।
2. गैर-मुस्लिमों की भागीदारी: विरोधियों का कहना है कि वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने से मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ सकता है।
3. सरकारी निगरानी बढ़ने की संभावना: कुछ लोगों को लगता है कि केंद्रीकृत पोर्टल और सरकारी अधिकारियों को अधिक शक्ति देने से वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है।
4. वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण: कई राज्यों में वक्फ संपत्तियों का पूर्ण सर्वेक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है जिससे पारदर्शिता की कमी बनी हुई है।
5. संवैधानिकता पर प्रश्नचिह्न: दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें पूछा गया है कि क्या केवल मुस्लिम समुदाय पर लागू होने वाला यह कानून संवैधानिक रूप से वैध है।