नई दिल्ली: केंद्र सरकार की तर्ज पर अब दिल्ली में भी ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इस वेब आधारित प्रणाली के जरिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और विभागों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। दिल्ली विधानसभा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव धर्मेंद्र को पत्र लिखकर जल्द से जल्द APMS को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए CAG रिपोर्ट पर विभागों की ओर से की जा रही कार्रवाई पर नजर रखी जा सकेगी। जिससे अनावश्यक देरी और कागजी प्रक्रिया खत्म होगी।
CAG रिपोर्ट पर जल्द से जल्द प्रस्तुत करें एक्शन नोट
गुप्ता ने चिंता जताई कि पिछले कई सालों में दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने CAG रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी विभागों को सख्त आदेश दिए जाएं कि वे CAG की टिप्पणियों पर जल्द से जल्द अपने एक्शन नोट प्रस्तुत करें।
जानें क्या है APMS?
लोक लेखा समिति की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग, लेखा महानियंत्रक कार्यालय ने लेखापरीक्षा पैरा निगरानी प्रणाली (एपीएमएस) शुरू की है जो सीएजी लेखापरीक्षा पैराग्राफों पर कार्रवाई की गई टिप्पणियों (एटीएन), पीएसी टिप्पणियों/सिफारिशों पर कार्रवाई की गई प्रतिक्रिया (एटीआर) और 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की अतिरिक्त व्यय या बचत पर व्याख्यात्मक नोट (ईएन) की प्रभावी निगरानी के लिए वेब आधारित कम्प्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली है। इसके अलावा पीएसी की सिफारिश और सीएजी कार्यालय के सुझाव पर निगरानी प्रकोष्ठ ने स्कैनिंग कार्य को कम करने और शारीरिक हस्तक्षेप से बचने के लिए एटीएन/एटीआर/ईएन को ऑनलाइन जमा करने के लिए मौजूदा एपीएमएस पोर्टल को ऑनलाइन संस्करण (एपीएमएस संस्करण 2.0) में अपग्रेड किया है।
केंद्र सरकार पहले से कर रही है APMS का इस्तेमाल
स्पीकर ने बताया कि भारत सरकार का व्यय विभाग पहले ही APMS पोर्टल के माध्यम से CAG रिपोर्ट पर विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की निगरानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी इस प्रणाली को लागू करना जरूरी है ताकि वित्तीय अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
APMS से बढ़ेगी पारदर्शिता
गुप्ता ने कहा कि APMS लागू होने से विभागों की जवाबदेही तय होगी और रिपोर्ट पर कार्रवाई में तेजी आएगी। उन्होंने मुख्य सचिव से 7 अप्रैल तक इस मामले में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
लंबे समय से कैग रिपोर्ट पर नहीं हुई कार्यवाही
बजट सत्र के दौरान स्पीकर ने बताया कि हाल ही में हुई एक बैठक में महालेखा परीक्षक ने उन्हें सूचित किया कि पिछले 10 वर्षों में न तो लोक लेखा समिति (PAC) और न ही सार्वजनिक उपक्रम समिति ने कोई रिपोर्ट पेश की है।
उन्होंने इसे गंभीर चूक बताते हुए कहा कि प्रशासनिक विभाग भी समय पर CAG रिपोर्ट पर कार्रवाई नोट पेश नहीं कर रहे हैं जबकि नियमानुसार तीन महीने के भीतर इसे सदन में पेश किया जाना चाहिए था।
CAG रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं
स्पीकर ने बताया कि CAG की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा समय पर ATN नहीं सौंपने से पूरी लेखा परीक्षा प्रक्रिया बेकार हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि APMS के जरिए रिपोर्टिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी जिससे प्रशासनिक ढांचा अधिक मजबूत और जवाबदेह बनेगा।