वाराणसी: अब उत्तर प्रदेश में पूरे प्रदेश के लिए त्योहारों और व्रतों की तिथि एक होगी। राज्य में अब पंचांग को लेकर होने वाले मतभेद समाप्त हो जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर काशी विद्वत परिषद ने इस नियम की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत प्रदेशभर में एक ही पंचांग का अनुसरण किया जाएगा जो काशी से प्रकाशित होगा। इसी पंचांग के आधार पर व्रत, पर्व और सार्वजनिक अवकाश का निर्धारण होगा।
प्रदेश के पंचांग में एकरूपता लाने की तैयारी
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में त्योहारों की तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। विभिन्न पंचांगों में तिथियों का अंतर होने के कारण एक ही त्योहार दो अलग-अलग दिनों में मनाया जाता था। इससे समाज में असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि पूरे प्रदेश में एकरूपता लाई जाए। इसी क्रम में काशी विद्वत परिषद ने प्रदेश के सभी प्रमुख पंचांगकारों को एक मंच पर लाकर एकरूप पंचांग तैयार करने की पहल की।अब 2026 में नवसंवत्सर के अवसर पर पूरे प्रदेश के लिए एक तिथि, एक त्योहार वाला पंचांग प्रकाशित किया जाएगा। इस पंचांग का प्रकाशन अन्नपूर्णा मठ मंदिर के द्वारा किया जाएगा। इसे संवत 2083 (2026-27) के लिए तैयार किया जाएगा।
काशी में पहले ही हो चुका है सभी पंचांगों का एकीकरण
काशी के पंचांगकारों ने पहले ही अपने पंचांगों में एकरूपता लाने का कार्य पूरा कर लिया है। इसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), काशी विद्वत परिषद और अन्य प्रमुख पंचांगकारों का योगदान रहा है। चैत्र प्रतिपदा से काशी के पंचांगों में समरूपता आ गई है। इसमें बीएचयू का विश्वपंचांग, ऋषिकेश पंचांग, महावीर पंचांग, गणेश आपा पंचांग, आदित्य पंचांग और ठाकुर प्रसाद पंचांग शामिल हैं। तीन वर्षों की मेहनत के बाद इन पंचांगों में एकरूपता स्थापित की गई है।
अब एक ही तिथि पर मनाए जाएंगे त्योहार
एक तिथि, एक त्योहार नियम लागू होने के बाद प्रदेश के प्रमुख व्रत और त्योहारों में अंतर नहीं रहेगा। अब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवरात्रि, रामनवमी, अक्षय तृतीया, गंगा दशहरा, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, महालया, विजयादशमी, दीपावली, नरक चतुर्दशी, भैया दूज, कार्तिक एकादशी, देवदीपावली, शरद पूर्णिमा, सूर्य षष्ठी, खिचड़ी और होली जैसे पर्व पूरे प्रदेश में एक ही दिन मनाए जाएंगे। इससे समाज में होने वाला भ्रम समाप्त होगा।
लोगों का दूर होगा भ्रम
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर विनय पांडेय का कहना है कि पंचांगों की एकरूपता से समाज में व्याप्त भ्रम समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि व्रत और त्योहारों का निर्धारण केवल उदया तिथि के आधार पर नहीं किया जाता बल्कि पर्व विशेष की तिथि के अनुसार उसका महत्व होता है। जैसे- रामनवमी के व्रत में मध्याह्नव्यापिनी तिथि, दीपावली में प्रदोषव्यापिनी, शिवरात्रि और जन्माष्टमी में अर्द्धरात्रि का विशेष महत्व होता है। साधारण व्रतों में उदया तिथि मान्य होती है जबकि विशेष व्रतों में तिथि का स्वरूप अलग होता है। इस नई व्यवस्था से समाज को सही तिथि पर त्योहार मनाने की सुविधा मिलेगी।