बिजनेस डेस्क: आज के समय में लगभग हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी का एक निश्चित हिस्सा प्रोविडेंट फंड (PF) में जमा होता है। यह राशि कर्मचारी और कंपनी दोनों के द्वारा मिलकर जमा की जाती है। हर महीने आपकी सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में जाता है। यह पैसा आपको रिटायरमेंट के समय दिया जाता है ताकि आप उस उम्र में आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें और बिना किसी परेशानी के जीवन व्यतीत कर सकें।
अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके पीएफ अकाउंट में कितनी राशि जमा हो चुकी है या आपकी कंपनी ने कितनी रकम जमा की है तो इसे आप घर बैठे ही आसानी से चेक कर सकते हैं। इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है बस आपके पास मोबाइल/लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए।
घर बैठे पीएफ बैलेंस चेक करने का तरीका
आज के डिजिटल युग में पीएफ बैलेंस जानना बेहद आसान हो गया है। इसके लिए आपको EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा और कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करना होगा।
नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करे:
स्टेप 1- वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले EPFO की आधिकारिक वेबसाइट https://www.epfindia.gov.in पर विजिट करें।
स्टेप 2- For Employees सेक्शन चुनें: होम पेज पर आपको "For Employees" का विकल्प मिलेगा उस पर क्लिक करें।
स्टेप 3- मेंबर पासबुक देखें: अगली स्क्रीन में "Member Passbook" का ऑप्शन दिखाई देगा उस पर क्लिक करें।
स्टेप 4- लॉगिन करें: लॉगिन पेज पर UAN (Universal Account Number) पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करें।
स्टेप 5- ओटीपी दर्ज करें: आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा जिसे दर्ज करके वेरीफाई करें।
स्टेप 6- बैलेंस देखें: ओटीपी सफलतापूर्वक सत्यापित होने के बाद आपके पीएफ खाते का बैलेंस स्क्रीन पर दिखाई देगा।
कहाँ कितना होता है जमा?
हर महीने कर्मचारी की सैलरी का 12% पीएफ के रूप में कटता है। इस 12% का कुछ हिस्सा पीएफ खाते में और कुछ पेंशन खाते में जाता है:
- 8.67% राशि पेंशन फंड में जमा होती है जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में मिलती है।
- बाकी 3.33% पीएफ खाते में जाता है जिसे आप जरूरत पड़ने पर निकाल सकते हैं।
आप अपने पीएफ खाते से पैसे मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या घर खरीदने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए निकाल सकते हैं।
1951 में हुए थी पीएफ की शुरुआत
भारत में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की शुरुआत 15 नवंबर 1951 को हुई थी। शुरुआत में इसे एक अध्यादेश के रूप में लागू किया गया था जिसे बाद में 1952 में कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम के तहत अधिसूचित किया गया। तब से यह योजना लाखों कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।