ममता कुलकर्णी ने किया भस्म श्रृंगार: तो वही धीरेंद्र शास्त्री और बाबा रामदेव पर बोला हमला कह दी ये बड़ी बात! जानें पूरी खबर
ममता कुलकर्णी ने किया भस्म श्रृंगार

प्रयागराज: पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी जिन्होंने अब आध्यात्मिकता का मार्ग चुना है, हाल ही में उन्हें किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद पर भी नियुक्त किया गया है। इस पद पर उनकी नियुक्ति के बाद कई विवाद सामने आए हैं। अब एक नई तस्वीर सामने आई है जिसमें ममता कुलकर्णी अपने चेहरे पर भस्म लगाकर साधना करते नजर आ रही है जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस अवसर पर किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उन्हें आशीर्वाद भी प्रदान किया।

24 जनवरी को ममता को मिला था महामंडलेश्वर का पद

24 जनवरी को किन्नर अखाड़े के एक विशेष कार्यक्रम में ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त किया गया था।  इस फैसले का कई धार्मिक नेताओं ने विरोध किया। विरोध करने वालों में प्रमुख नाम बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री और योग गुरु बाबा रामदेव का है। धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी को भी मात्र बाहरी प्रभाव के आधार पर संत या महामंडलेश्वर नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार यह पद केवल उसी व्यक्ति को दिया जाना चाहिए जो सच्चे साधु भाव और गहरी तपस्या से परिपूर्ण हो।


ममता ने धीरेंद्र शास्त्री को मौन रहने की दी सलाह

इस आलोचना पर ममता कुलकर्णी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की उम्र जितनी है उससे अधिक समय तक उन्होंने कठिन तपस्या की है। उनके अनुसार धीरेंद्र शास्त्री उनकी साधना के स्तर को समझने में असमर्थ हैं। ममता कुलकर्णी ने आगे कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य दिव्य दृष्टि रखते हैं और वे ही बता सकते हैं कि वह कौन हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को यह सुझाव भी दिया कि वे इस विषय पर और अधिक टिप्पणी करने के बजाय मौन रहें।

बाबा रामदेव के विरोध पर प्रतिक्रिया

बाबा रामदेव के विरोध पर ममता कुलकर्णी ने भी अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव को महाकाल और महाकाली का भय होना चाहिए। ममता ने यह भी कहा कि वह बाबा रामदेव के बारे में अधिक कुछ नहीं कहना चाहती क्योंकि समय ही सबकुछ स्पष्ट कर देगा। गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने कहा था कि संतत्व किसी को एक दिन में प्राप्त नहीं हो सकता। इसके लिए वर्षों की कठोर साधना और तपस्या आवश्यक होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल किसी को भी आसानी से महामंडलेश्वर बना दिया जाता है जो उचित नहीं है।

आर्थिक स्थिति को लेकर उठे सवाल

महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता कुलकर्णी पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने इस पद के लिए धन का इस्तेमाल किया है। इस पर ममता कुलकर्णी ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पास तो कोई पैसा नहीं है क्योंकि उनके सभी बैंक खाते पहले ही सीज कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने गुरु को भेंट देने के लिए दो लाख रुपये उधार लेकर चढ़ाए थे। ममता कुलकर्णी के अनुसार वह कभी भी इस पद के लिए इच्छुक नहीं थीं लेकिन किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के आग्रह पर उन्होंने इसे स्वीकार किया।

अखाड़े से निष्कासन का दावा और उसका खंडन

किन्नर अखाड़े के एक अन्य संत ऋषि अजय दास ने यह दावा किया कि उन्होंने ममता कुलकर्णी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है। उनके अनुसार ममता को महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया अखाड़े के नियमों के अनुसार नहीं हुई थी। अजय दास ने यह भी कहा कि जिन पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगे हों उन्हें इस प्रकार के महत्वपूर्ण धार्मिक पद पर नहीं बैठाया जाना चाहिए।

हालांकि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अजय दास के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अजय दास को तो वर्ष 2017 में ही किन्नर अखाड़े से बाहर कर दिया गया था और उनके पास अब ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वे किसी को अखाड़े से बाहर निकाल सकें। त्रिपाठी के अनुसार अजय दास केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। इस विवाद पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने भी प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि वे लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अजय दास को जानते तक नहीं हैं।

महाकुंभ में ममता कुलकर्णी का पट्टाभिषेक समारोह

महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान और पिंडदान के बाद ममता कुलकर्णी का भव्य पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया गया। इस विशेष अवसर पर उनका नया नाम ‘श्रीयामाई ममता नंद गिरि’ रखा गया। इस कार्यक्रम में कई साधु-संतों और किन्नर अखाड़े के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया। ममता कुलकर्णी ने महाकुंभ के दौरान सात दिनों तक धार्मिक अनुष्ठानों और साधना में भाग लिया।

मैंने किसी पद के लिए यह मार्ग नहीं चुना-ममता कुलकर्णी

ममता कुलकर्णी के अनुसार उनकी आध्यात्मिक यात्रा अचानक शुरू नहीं हुई। उन्होंने वर्षों तक कठिन तपस्या और साधना की है जो अब उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उनका मानना है कि उनकी साधना कोई दिखावा नहीं है बल्कि यह उनके आत्मिक उत्थान का मार्ग है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं को परमात्मा की खोज में समर्पित किया है और किसी पद या मान्यता के लिए यह साधना नहीं की है।

ममता कुलकर्णी का यह आध्यात्मिक परिवर्तन और महामंडलेश्वर बनने की यात्रा न केवल धार्मिक जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है बल्कि यह भी दर्शाती है कि कोई व्यक्ति अपने भूतकाल से ऊपर उठकर नई पहचान बना सकता है। जहां एक ओर उनके फैसले की आलोचना की जा रही है वहीं दूसरी ओर कई लोग उनके साहस और साधना की सराहना भी कर रहे हैं। चाहे यह विवाद जैसा भी हो ममता कुलकर्णी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी आस्था और साधना पर किसी भी आलोचना का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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