महाकुंभ 2025 ने बदली छोटे कारीगरों की तकदीर!: मेले की वजह से राज्य के हर जिले पर हो रही पैसों की बारिश, सिर्फ छोटे कारीगरों को मिले 10 हजार करोड़ के ऑर्डर
महाकुंभ 2025 ने बदली छोटे कारीगरों की तकदीर!

महाकुंभ: महाकुंभ 2025 प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का उदाहरण बन गया है। 40 करोड़ श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए तैयार इस धार्मिक आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश के सभी 75 जिलों के कारीगरों और उद्यमियों के लिए यह आयोजन समृद्धि का अवसर लेकर आया है। छोटे कारीगरों और लघु उद्यमियों को अकेले 10 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं जिससे स्थानीय व्यवसायों को नई ऊर्जा मिली है।

बुनियादी जरूरतों से 17310 करोड़ का होगा राजस्व

राज्य सरकार ने महाकुंभ के आयोजन के लिए 7500 करोड़ रुपये का विशाल बजट निर्धारित किया है। इस राशि से अनुमानित रूप से 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व और लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की संभावना है। इस आयोजन ने जूता-चप्पल बनाने वाले कारीगरों से लेकर हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों तक के लिए आय के साधन तैयार किए हैं। किराना सामान, खाद्य तेल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, बिस्तर और अन्य दैनिक आवश्यकताओं के क्षेत्रों में भी व्यापक व्यापारिक गतिविधियां हो रही हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार बुनियादी जरूरतों से ही महाकुंभ के दौरान लगभग 17,310 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित होगा।

महाकुंभ ने हर जिले को दिया रोजगार

महाकुंभ ने राज्य के हर जिले में रोजगार के नए द्वार खोले हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल के अनुसार इस आयोजन से होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, निर्माण, सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 10 हजार से अधिक श्रमिकों और अकुशल कारीगरों को रोजगार मिला है जिनकी आपूर्ति मुख्य रूप से देवरिया, बलिया, महराजगंज, कुशीनगर और कानपुर जैसे जिलों से हुई है।

कपड़े के व्यापारियों को हुआ विशेष लाभ

हस्तशिल्प और रेडीमेड वस्त्रों का व्यापार भी तेजी से बढ़ा है। भोजन, पूजा सामग्री और स्मृति चिन्हों की मांग ने स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को लाभ पहुंचाया है। गौतमबुद्ध नगर, कानपुर, गाजियाबाद, बनारस, मिर्जापुर और उन्नाव के कारीगरों को कपड़े के व्यापार में विशेष लाभ हुआ है।

भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की निर्बाध आपूर्ति ने गोरखपुर, मेरठ, हापुड़, लखनऊ, सीतापुर और झांसी जैसे जिलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। पर्यटन और परिवहन सेवाओं ने मथुरा, वाराणसी, कानपुर और बागपत जैसे जिलों को करोड़ों का व्यापार दिया है।

ब्रांड्स ने दिया 9000 युवाओं को रोजगार

महाकुंभ में टेंट सिटी जैसी परियोजनाओं ने भी स्थायी रोजगार के अवसर बनाए हैं। 82 बड़े ब्रांड्स और 178 राष्ट्रीय ब्रांड्स ने अस्थायी रूप से 9000 युवाओं को रोजगार प्रदान किया है।

कुल मिलाकर प्रयागराज महाकुंभ ने धार्मिक आयोजन के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को समृद्धि मिली है बल्कि राज्य में व्यापार और रोजगार की संभावनाओं को भी विस्तार मिला है। यह आयोजन प्रदेश के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित हो रहा है।

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