CM योगी ने श्रद्धालुओं से की अपील!: बोले-अफवाहों पर ध्यान न दें, जहां पर हैं वहीं करें स्नान, धर्म गुरु बोले-सभी घाटों पर स्नान करना उतना ही पवित्र और पुण्यदायक...
CM योगी ने श्रद्धालुओं से की अपील!

प्रयागराज: मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के शुभ अवसर पर महाकुंभ में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। मंगलवार आधी रात के बाद स्थिति गंभीर हो गई और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई जिसमें 20 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत तो वही 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर हैं।

 प्रशासन तेजी से हालात को संभालने में जुटा हुआ है। ऐसे में NCR पत्रिका भी श्रद्धालुओं से अपील करती है कि वे संगम की ओर जाने का प्रयास न करें बल्कि अपने नजदीकी घाट पर ही स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करें और फिर अपने घर लौट जाएं।

12 किमी में बने 44 घाट, किसी भी घाट पर स्नान करें

महाकुंभ क्षेत्र में इस बार 12 किलोमीटर की परिधि में 44 स्नान घाटों की व्यवस्था की गई है। यह आवश्यक नहीं कि पुण्य लाभ केवल संगम में स्नान करने से ही प्राप्त होगा। श्रद्धालु कहीं भी स्नान करें उन्हें समान रूप से आध्यात्मिक फल मिलेगा। प्रशासन श्रद्धालुओं से लगातार आग्रह कर रहा है कि वे संगम नोज की ओर जाने की बजाय अपने आसपास के घाटों पर ही स्नान करें, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था और दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं और सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे जहां हैं वहीं स्नान करें। संगम नोज की ओर बढ़ने से बचें और अनावश्यक भीड़भाड़ न बढ़ाएं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

धार्मिक गुरुओं की अपील: नजदीकी घाटों पर करें स्नान

महान संत और धर्मगुरु भी श्रद्धालुओं से अपील कर रहे हैं कि वे संगम में जाने की जिद्द न करें बल्कि जहां स्थान मिले, वहीं स्नान करें।

स्वामी रामभद्राचार्य:

स्वामी रामभद्राचार्य ने सभी भक्तों से आग्रह किया कि अत्यधिक भीड़ को देखते हुए केवल संगम घाट पर स्नान करने की जिद्द न करें। अन्य घाटों पर भी स्नान करना उतना ही पवित्र और पुण्यदायक होगा।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर:

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी श्रद्धालुओं को सलाह दी कि संगम घाट की ओर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि गंगा और यमुना की पूरी धारा में अमृत प्रवाहित हो रहा है इसलिए जहां भी स्नान करेंगे आपको उतना ही पुण्य प्राप्त होगा।

महंत हरि गिरि:

जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि ने भी यही अपील की कि श्रद्धालु गंगा में स्नान कर अपने घरों को लौट जाएं। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से प्राप्त पुण्य केवल संगम में ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रयागराज क्षेत्र में गंगा स्नान का समान आध्यात्मिक महत्व है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष निर्देश

प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई घोषणाएं की हैं कि भक्तजन अनावश्यक रूप से संगम की ओर न बढ़ें। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष दिशानिर्देश जारी किए गए हैं:

वाराणसी और जौनपुर से आने वाले श्रद्धालु झूंसी के एरावत घाट पर स्नान करें।

मिर्जापुर, चित्रकूट और रीवा से आने वाले श्रद्धालु अरैल क्षेत्र में स्नान करें।

अयोध्या और लखनऊ से आने वाले श्रद्धालु रसूलाबाद और फाफामऊ क्षेत्र में ही स्नान करें।


इस तरह से 12 किलोमीटर में बनाए गए 44 घाटों पर स्नान संभव है, जिससे मुख्य घाटों पर भीड़ को कम किया जा सके।

स्नान के शुभ मुहूर्त

प्रयाग धर्म संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने स्नान के लिए चार शुभ मुहूर्त बताए हैं:

1. ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:18 बजे तक


2. अमृत काल: सुबह 9:19 से 10:51 बजे तक


3. विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:05 बजे तक


4. गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 से 6:22 बजे तक


इन मुहूर्तों में स्नान करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।


महाकुंभ में सुरक्षित और शांतिपूर्ण स्नान करें

महाकुंभ एक विशाल आयोजन है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ऐसे में व्यवस्था बनाए रखना सभी का कर्तव्य है। प्रशासन, पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाएं पूरी तत्परता से कार्य कर रही हैं लेकिन श्रद्धालुओं से भी अपेक्षा है कि वे संयम बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें।

इसलिए, महाकुंभ में आए सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे अपने नजदीकी घाटों पर ही स्नान करें और भीड़भाड़ से बचें, जिससे इस महान आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाया जा सके।

अन्य खबरे