महाकुंभ नगर: प्रयागराज के संगम तट पर महाकुंभ का आयोजन पूरे भव्यता और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हो चुका है। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर आयोजित इस महायज्ञ में पहले अमृत स्नान के अवसर पर लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त करने उमड़े। पौष पूर्णिमा के बाद मंगलवार को मकर संक्रांति के दिन से शुरू हुआ महास्नान, धर्म और आस्था का अनुपम संगम बन गया।
महाकुंभ का प्रथम स्नान
महाकुंभ के इस पवित्र आयोजन में मेला प्रशासन ने परंपराओं और मान्यताओं का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया। विभिन्न अखाड़ों को उनके तय क्रम के अनुसार अमृत स्नान के लिए बुलाया गया। मंगलवार सुबह 10 बजे तक संगम में एक करोड़ 38 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर संत-महात्माओं और अखाड़ों के नागा साधुओं की शोभायात्रा ने वातावरण को और भी भक्ति मय कर दिया।
महानिर्वाणी अखाड़ा ने सबसे पहले किया स्नान
परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति पर सबसे पहले श्रीपंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने अमृत स्नान किया। इसके बाद श्रीशंभू पंचायती अटल अखाड़े ने स्नान किया। श्रीतपोनिधि पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा और श्रीपंचायती आनंद अखाड़ा ने भी क्रमबद्ध तरीके से स्नान में भाग लिया। इसके साथ ही श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्रीपंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और श्रीपंचाग्नि अखाड़े के संन्यासी भी स्नान में सम्मिलित हुए।
नागा साधुओं की शोभायात्रा ने खींचा ध्यान
पंचायती निर्वाणी अखाड़े के नागा साधुओं ने शाही अंदाज में स्नान किया। उनके हाथों में भाला, त्रिशूल और तलवारें थीं। साधु रथों और घोड़ों पर सवार होकर शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। उनके साथ चल रही भजन मंडलियां और जयघोष करते श्रद्धालु पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहे थे।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
प्रयागराज के संगम क्षेत्र में सोमवार रात से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सिर पर गठरी और कंधे पर झोला लिए संगम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। भक्तों के उत्साह का आलम यह था कि उन्होंने रात के समय से ही स्नान शुरू कर दिया। संगम के तट पर तिल रखने की जगह भी नहीं बची थी।
भीड़ प्रबंधन के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था
मेला क्षेत्र में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए। बैरिकेडिंग और गहन जांच के बाद ही लोगों को प्रवेश दिया गया। हर मार्ग पर पुलिस और सुरक्षा बल तैनात थे। मेला क्षेत्र में घुड़सवार पुलिस ने पैदल मार्च कर अखाड़ों को स्नान के लिए सुरक्षित मार्ग दिया। डीआईजी वैभव कृष्ण और एसएसपी राजेश द्विवेदी ने स्वयं व्यवस्था का जायजा लिया।
संगम तट पर गूंजे भक्ति के जयघोष
स्नान घाटों पर हर हर महादेव और जय श्री राम के गगनभेदी जयघोष से माहौल दिव्यता से भर गया। साधु-संतों के अमृत स्नान के बाद आम श्रद्धालुओं ने भी पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान घाटों पर लोग पुआल पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
रात से ही उमड़ी भीड़
महाकुंभ नगर के मुख्य मार्गों पर सोमवार शाम से ही भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। आधी रात के बाद यह जनसागर संगम तट की ओर बढ़ने लगा। 12 किलोमीटर में फैले 44 स्नान घाटों पर श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर स्नान का इंतजार कर रहे थे।
मकर संक्रांति पर दान का महत्व
आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गरीबों को भोजन कराना, कंबल और खिचड़ी का दान करना पुण्यदायी होता है। हालांकि लोहा और उड़द का दान वर्जित बताया गया।
आज के दिन 2.5 करोड़ लोग करेंगे स्नान
प्रशासन के अनुसार, इस पहले स्नान पर्व पर लगभग ढाई करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। फाफामऊ से अरैल तक के घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। वाहनों को छह-सात किलोमीटर पहले रोकने के कारण श्रद्धालु पैदल ही संगम तट की ओर बढ़े।
भक्ति, आस्था और दिव्यता का संगम
मकर संक्रांति के महास्नान ने पूरे महाकुंभ नगर को भक्ति और दिव्यता से ओतप्रोत कर दिया। जय गंगा मैया और जय श्री राम के जयघोष के बीच श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पुण्य लाभ के लिए तत्पर दिखे। यह आयोजन सनातन धर्म की गहरी आस्था और परंपरा का प्रतीक है।
महाकुंभ का यह महास्नान न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनूठा है। देश-दुनिया से आए करोड़ों श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।