1500 करोड़ की टैक्स चोरी! काउंटी ग्रुप पर इनकम टैक्स की रेड: चल रही छापेमारी 6 दिन बाद समाप्त, करोड़ों के नकदी गहने बरामद वही बैंक लॉकर?
1500 करोड़ की टैक्स चोरी! काउंटी ग्रुप पर इनकम टैक्स की रेड

नोएडा: आपको बता दें कि बीते दिनों शहर के मशहूर रियल एस्टेट ग्रुप काउंटी और उससे जुड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा। लगभग 6 दिन तक चली इस कार्रवाई में करीब 1500 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई। इस मामले में काउंटी ग्रुप से जुड़े कई बिल्डर और चैनल पार्टनर भी इनकम टैक्स के रडार पर आ गए हैं।

करोड़ों की नकदी और गहने हुए बरामद

छापेमारी के दौरान 47 करोड़ रुपये के गहने और सवा छह करोड़ रुपये कैश बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई बैंक लॉकर भी पकड़े गए जिन्हें फिलहाल सील कर दिया गया है। अब धीरे-धीरे इन्हें खोला जाएगा ताकि पता लगाया जा सके कि इनमें और कितनी संपत्ति या टैक्स चोरी से जुड़े सबूत छिपे हैं।

कैसे हुआ टैक्स चोरी का खेल?

सूत्रों के मुताबिक काउंटी ग्रुप जमीन की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाकर फ्लैट बेच रहा था। असली कीमत से ज्यादा दिखाकर काले धन को सफेद किया जा रहा था। लेनदेन का बड़ा हिस्सा कैश में किया जाता था ताकि टैक्स से बचा जा सके। इसके लिए शेल कंपनियों का भी इस्तेमाल हुआ जिनके जरिए पैसों को इधर-उधर घुमाया गया।

बिल्डर माफिया की संलिप्तता भी उजागर

इस कार्रवाई में यह भी सामने आया है कि कई बड़े बिल्डर और रियल एस्टेट माफिया इसमें शामिल थे। इनकम टैक्स की टीम ने छानबीन के दौरान इनकी पूरी कुंडली बना ली है और अब आगे इन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है।

30 ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी

5 मार्च को इनकम टैक्स विभाग ने नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली और कोलकाता में 30 जगहों पर एक साथ छापा मारा।
जिसमें नोएडा के 16,  गाजियाबाद के 6,  गुरुग्राम के 4, दिल्ली के 2 और कोलकाता के 3 ठिकानों पर करवाई हुई।शुरुआत में यह सिर्फ एक सर्च ऑपरेशन था लेकिन जैसे-जैसे कैश और अहम दस्तावेज मिलने लगे इसे सर्वे में बदल दिया गया। छापेमारी ग्रुप के कॉर्पोरेट ऑफिस, बिल्डिंग साइट, डायरेक्टर्स, एमडी, सीएमडी और चैनल पार्टनर्स के ठिकानों पर हुई।

लॉकरों की जांच बाकी

लॉकरों की जांच के बाद और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था। आने वाले दिनों में कई और बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों पर भी गाज गिर सकती है।

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