नोएडा: नोएडा में कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे के लिए दो बड़े मैथेनाइजेशन प्लांट लगाए जाएंगे। ये प्लांट सेक्टर-119 और सेक्टर-50 में स्थापित किए जाएंगे जिनकी कुल क्षमता 40 टन होगी। इनमें 15 टन क्षमता मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और 25 टन क्षमता बायो-मैथेनाइजेशन प्लांट के रूप में काम करेगी। इसके अलावा गीले कचरे के निपटारे के लिए एक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है जिसकी जगह तय करना अभी बाकी है।
कैसे काम करता है मैथेनाइजेशन प्लांट?
मैथेनाइजेशन प्लांट जैविक कचरे को ऊर्जा और उपयोगी उत्पादों में बदलने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो मुख्य रूप से एनेरोबिक डाइजेशन पर आधारित होती है। इस प्रक्रिया में गीले कचरे जैसे भोजन के अवशेष और सब्जियों के छिलकों को डाइजेस्टर टैंक में डाला जाता है जहां बैक्टीरिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कचरे को विघटित करते हैं। इससे मीथेन गैस और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है। मीथेन गैस को बायोगैस के रूप में बिजली उत्पादन या ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जबकि बचे हुए अवशेष (स्लरी) को जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल कचरे का प्रभावी प्रबंधन करती है बल्कि ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद भी प्रदान करती है।
5000 वर्ग मीटर क्षेत्र में लगाया जाएगा प्लांट
यह नया प्लांट लगभग 5,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थापित होगा और इसका उद्देश्य कचरे को वैज्ञानिक तरीके से संभालना है। प्लांट के लिए चयनित कंपनी को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की भी जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए संबंधित सेक्टरों के बारे में कंपनी को जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को 15 साल तक यह काम करने का अनुबंध दिया जाएगा। जिसे सफल संचालन के बाद 3 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
10 करोड़ की लागत से बनेगा प्लांट
इस परियोजना पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्राधिकरण जल्द ही दूसरे छोटे प्लांट्स स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। योजना के तहत सेक्टर-43, 54, 145 और 168 में भी छोटे पैमाने पर प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। इनकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होगी और इनका मुख्य उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों का कचरा संभालना होगा।
फिलहाल सेक्टर-145 में पड़ रहा है पूरे शहर का कचरा
फिलहाल नोएडा के सेक्टर-145 में पूरे शहर का कचरा डाला जा रहा है जहां लगभग दो लाख मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा हो चुका है। इसका निपटारा शुरू हो गया है लेकिन शहर को कचरे के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है।
11 फरवरी तक कम्पनियां कर सकती हैं आवेदन
प्राधिकरण ने प्लांट लगाने के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इच्छुक कंपनियां 11 फरवरी तक आवेदन कर सकती हैं। 12 फरवरी को बिड खोली जाएगी और सबसे कम लागत में काम करने वाली कंपनी का चयन किया जाएगा।
इस परियोजना के अगले कुछ महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। यह पहल नोएडा में कचरे के उचित प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करेगी।