नोएडा: आपको बता दें कि नोएडा पुलिस ने सेक्टर-63 में चल रही एक फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ किया है जो स्टार्टअप कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूटर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठग रही थी। पुलिस ने इस गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जिनमें 10 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल हैं। ये लोग सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क चलाते थे और देशभर में लोगों को अपना शिकार बना रहे थे।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी के मुताबिक सेक्टर-63 के जी-65 जी ब्लॉक में "डिस्ट्रिब्यूटर चैनल भारत" नाम से एक फर्जी कंपनी चलाई जा रही थी। हाल में जम्मू निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उससे 4.86 लाख रुपये ठग लिए गए हैं। इस शिकायत के आधार पर पुलिस और साइबर टीम ने जब वहां छापा मारा तो मौके से कई लैपटॉप, डेस्कटॉप और ठगी से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
जब पुलिस ने कंपनी की गतिविधियों की गहराई से जांच की तो पता चला कि यह एक संगठित ठगी का गिरोह है जो पहले भी नाम और पते बदलकर अपना काम करता आ रहा है।
ठगी का तरीका?
गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। ये लोग दावा करते थे कि जो भी अपने उत्पादों का प्रचार और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क बनाना चाहता है उनकी कंपनी इसमें उनकी मदद करेगी। इसके लिए ग्राहकों को 3 से 4 लाख रुपये तक के महंगे पैकेज बेचे जाते थे। ग्राहकों को यह भरोसा दिया जाता था कि उन्हें हर महीने 8 से 10 डिस्ट्रीब्यूटर मिलेंगे जो उनके प्रोडक्ट्स को तेजी से बेचकर भारी मुनाफा कमाने में मदद करेंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उनके प्रोडक्ट्स का प्रचार भी किया जाएगा।
अधिकतर ग्राहक दूर-दराज के राज्यों से होते थे ताकि वे आसानी से कंपनी के दफ्तर न आ सकें और ठगी का खुलासा होने में वक्त लगे। जब किसी को शक होता या पुलिस का दबाव बढ़ता तो ये लोग 3-4 महीने में अपना ऑफिस बदल लेते थे।
कर्मचारियों को मिलता था इंसेंटिव
कंपनी के कर्मचारी इस ठगी के खेल में अहम भूमिका निभाते थे। कंपनी के कर्मचारी ज्यादा से ज्यादा पैकेज बेचने की कोशिश करते थे जिससे उन्हें मोटा इंसेंटिव मिल सके।
कंपनी का नाम बदलकर करते आ रहे है ठगी
एचआर मैनेजर कृतिका ने पूछताछ के दौरान बताया गया कि मेरी ज्वाइनिंग करीब 02 साल पहले वाया ट्रेड प्रालि कंपनी में एचआर के पद पर हुई थी। वह कंपनी भी डायरेक्टर मयंक तिवारी की थी। मयंक तिवारी को करीब 02 साल से जानती हूं। मेरे द्वारा कंपनी में कर्मचारी का चयन और उनके कार्य का निर्धारण किया जाता था। जब उस कंपनी पर कानूनी शिकंजा कसने लगा तो इसका नाम और पता बदलकर नई कंपनी बना ली गई और ठगी का धंधा जारी रहा।
कंपनी द्वारा उत्पादकों को स्क्रिप्ट के अनुसार लुभावने ऑफर देकर अपना पैकेज खरीदने के लिये तैयार किया जाता था।
पकड़े गए आरोपियों का कंपनी में रोल
गिरफ्तार किए गए लोगों में कई पढ़े-लिखे प्रोफेशनल भी शामिल हैं। इनमें एमबीए, बीटेक और एमसीए डिग्री धारक लोग भी हैं जो ठगी का पूरा सिस्टम चला रहे थे।
कृतिका (एमबीए, एचआर मैनेजर)
निधि (बीकॉम, सीआरएम एक्जीक्यूटिव)
अंजली पांडेय (एमबीए, सीआरएम एक्जीक्यूटिव)
केशव वशिष्ठ (बीटेक, सीआरएम टीम लीडर)
विकास शर्मा (एमबीए, टीम लीडर)
रवि शर्मा (बीकॉम, सेल्स एक्जीक्यूटिव)
अमित (12वीं पास, सेल्स एक्जीक्यूटिव)
प्रदीप (एमबीए, सेल्स टीम लीडर)
अविनाश गिरी (एमसीए, वेब डेवलपर)
आशीष कुमार मौर्या (बीसीए, ग्राफिक्स डिजाइनर)
रितेश कुमार (एमए, वेब डेवलपर)
मनीष गौतम (बीटेक, आईटी टीम लीडर)
रितेश कुमार (बीटेक, सीआरएम एक्जीक्यूटिव)
पुलिस की जांच जारी
फिलहाल पुलिस इस गिरोह के डेटा बेस की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोगों को ठगा गया है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं।