नोएडा प्राधिकरण की 3 बिल्डर कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: वित्तीय धोखाधडी को लेकर EOW को लिखा पत्र! जानें पूरा मामला
नोएडा प्राधिकरण की 3 बिल्डर कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

अर्थव्यवस्था: नोएडा प्राधिकरण के द्वारा 3 बिल्डरों पर बड़ा ऐक्शन लिया गया है। दअरसल निर्माण नहीं करने तथा बायर्स का पैसा किसी अन्य प्रोजेक्ट में लगा देने की वजह से ही नोएडा प्राधिकरण के द्वारा ऐसे 2 बिल्डर कंपनी पर वित्तीय जांच के लिए ऐक्शन लेने की बात कही गई है। इस पूरे मामले की वित्तीय जांच के लिए नोएडा प्राधिकरण के द्वारा आर्थिक अपराध की शाखा दिल्ली को एक पत्र लिखा गया है। इसके अतिरिक्त 1 अन्य बिल्डर से बकाया वसूली के लिए आरसी (RC) जारी की गई है। वहीं अब बिल्डर से भू राजस्व के हिसाब से पूरा बकाया वसूल किया जाएगा।

आइए समझते हैं तीनों बिल्डरों के खिलाफ क्या है पूरा मामला:

पहला मामला: नोटिस जारी करने के बावजूद भी बिल्डर ने नहीं कराया फ्लैट्स का निर्माण

दअरसल प्राधिकरण के द्वारा 23 मार्च 2010 कि तारीख को जीएच-05 सेक्टर-137 का आवंटन शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम किया गया था। वहीं 30 जुलाई 2010 को लीजडीड करते हुए 20 अगस्त 2010 कि तारीख को प्लाट पर बिल्डर को कब्जा दे दिया गया था।लेकिन प्राधिकरण का यह कहना है कि प्लाट की राशि जमा कराने के लिए आवंटी को कई बार प्राधिकरण की तरफ से नोटिस भी जारी किया गया। लेकिन बिल्डर के द्वारा न तो पैसा जमा कराया गया तथा न ही फ्लैटों का निर्माण कराया गया। वहीं इस परियोजना के प्रमोटर मुकेश खुराना तथा दीवाकर शर्मा समेत कमल सिंह रोथान, हरीश कुमार तथा पीयूष तिवारी के द्वारा उक्त परियोजना के फ्लैटों को बेचकर तृतीय पक्षीय अधिकार सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही इस परियोजना से मिली हुई धनराशि को भी प्राधिकरण में नहीं जमा करके वित्तीय हानि पहुंचाई गई। ऐसे में प्राधिकरण ही के द्वारा उक्त बिल्डर के खिलाफ वित्तीय जांच के लिए EOW को शिकायत की गई है।

दूसरा मामला: फ्लैट बेचने से मिली धनराशि को प्राधिकरण में नहीं कराया जमा

दअरसल ग्रुप हाउसिंग जीएच-01 सेक्टर-118 में करीब 133750 वर्गमीटर का आवंटन 18 अप्रैल साल 2007 को आईवीआरसीएल (IVRCL) इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को किया गया था। जिसका नाम बाद में आईवीआर (IVR) प्राइम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड करते हुए 19 अप्रैल साल 2012 को लीज डीड की गई थी। 

वहीं आवंटी को 25 अप्रैल 2012 कि तारीख को प्लाट पर कब्जा भी दे दिया गया था। लेकिन यहां पर भी आवंटी को पैसा जमा करने के लिए कई नोटिस जारी किए गए। लेकिन इस परियोजना के प्रमोटर ईला रेड्डी तथा ई सुधीर रेड्डी समेत टीएन चतुर्वेदी, आरसी सिन्हा तथा टीआर सी बॉस एवं आशीष के द्वारा परियोजना के फ्लैट बेचकर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किए गए। 

इसके अतिरित परियोजना के अंतर्गत फ्लैटों को बेचने के बाद मिली धनराशि को भी बिल्डर के द्वारा नोएडा प्राधिकरण में जमा नहीं कराया गया। इस पूरे मामले के पश्चात बिल्डर के खिलाफ ईओडब्ल्यू (EOW) दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई गई है।

तीसरा मामला: कोविड-19 का लाभ मिलने के बावजूद आवंटी ने बकाया का 25% भी नहीं किया जमा

बता दें कि ग्रुप हाउसिंग भूखंड जीएच-02B सेक्टर-76 में करीब 20 हजार वर्गमीटर पर सेठी बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड को 9 जून 2010 कि तारीख को सब लीज किया गया था। वहीं 10 जून 2010 को लीज डीड करते हुए कंपनी को प्लाट पर कब्जा भी दे दिया गया। वहीं बकाया धनराशि जमा करने के लिए कई नोटिस भी जारी किए गए लेकिन कोई धनराशि जमा नहीं की गई। 

यही नहीं 21 दिसंबर साल 2023 के क्रम में कोविड-19 का फायदा देते हुए बकाया का सिर्फ 25 प्रतिशत जमा करने के लिए भी उसे सूचित किया गया। लेकिन आवंटी के द्वारा तब भी पैसा जमा नहीं किया गया। ऐसे में 31 दिसंबर 2023 तक देखें तो कुल 57.65 करोड़ रुपए की राशि बकाया है। 

इस पूरे मामले को देखते हुए ही नोएडा प्राधिकरण के द्वारा इस धनराशि को वसूलने के लिए आरसी (RC) जारी की गई है। इसका अर्थ यह हुआ कि अब यह पैसा भू राजस्व की तरह से वसूल किया जाएगा। जिसके लिए ही कलेक्टर गौतमबुद्ध नगर को एक पत्र लिखा गया है।

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