नोएडा में एक और फर्जीवाड़ा: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 8 साल पहले मर चुके व्यक्ति की करोड़ों की प्रॉपर्टी हुई ट्रांसफर! जाने क्या हैं पूरा मामला
नोएडा में एक और फर्जीवाड़ा

नोएडा: हाल ही में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हरी शंकर मिश्रा की संपत्ति को लेकर विवाद चल ही रहा था कि तभी नोएडा प्राधिकरण में फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराने का एक और मामला सामने आया है। इस बार, एक व्यक्ति ने मृतक रिटायर्ड अधिकारी की पहचान चुराकर उनके नाम से आधार, पैन और अन्य दस्तावेज तैयार किए और 450 वर्गमीटर का एक प्लॉट किसी अन्य कंपनी को बेच दिया। यह प्लॉट नोएडा के सेक्टर-40 में स्थित है और इसकी अनुमानित कीमत लगभग 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

प्राधिकरण अपने स्तर पर करा रही जांच

प्राधिकरण ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है जिसके लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी का ट्रांसफर ऑफ मेमोरंडम कैसे किया गया। जबकि मूल आवंटी का निधन लगभग 8 साल पहले हो चुका था। इस मामले में धोखाधड़ी के लिए दस्तावेजों की एक लंबी श्रृंखला शामिल है। जिसमें प्लॉट के फर्जी कागजात, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक में किया गया चालान शामिल हैं।

पूरा फर्जीवाड़ा नोएडा प्राधिकरण के आवासीय प्लॉट विभाग से शुरू हुआ, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एनओसी जारी की गई। स्पष्ट है कि बिना किसी मिलीभगत के ऐसा संभव नहीं था। इस कारण प्राधिकरण इस पूरे मामले की अपने स्तर पर जांच करवा रहा है और सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

जालसाजों ने इस अपराध को अंजाम देने के लिए पहले मृतक प्लॉट मालिक वाई जानकी रमैया के नाम पर एक नया आधार कार्ड बनवाया। फिर दिल्ली से एक व्यक्ति को लाकर उसे प्लॉट मालिक के रूप में पेश किया गया। इसके बाद एक दलाल के नाम पर एग्रीमेंट किया गया और फिर यह प्लॉट एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। जब खरीदार ने प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू किया तो मृतक की बेटी को इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली और उन्होंने तुरंत थाना सेक्टर-39 में एफआईआर दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू की गई।

पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनके नाम शोएब, संदीप गोयल और शमशेर हैं। इनमें शमशेर को फर्जी तरीके से प्लॉट का मालिक बनाया गया था। पुलिस ने इन आरोपियों से पूछताछ की और पाया कि इस पूरे षड्यंत्र में कई फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया था जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, प्लॉट के कागजात और बैंक में किए गए लेन-देन शामिल थे।

धोखाधड़ी रोकने के लिए बनाया जायेगा एक विशेष सॉफ्टवेयर

नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल ने बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए नई सुरक्षा प्रणाली विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। प्राधिकरण एक विशेष सॉफ़्टवेयर बनाने की योजना बना रहा है जिसके तहत किसी भी प्रॉपर्टी ट्रांसफर से पहले मूल आवंटी को एक एसएमएस भेजा जाएगा। जब तक वे इसे सत्यापित नहीं करेंगे तब तक प्रॉपर्टी का ट्रांसफर आगे नहीं बढ़ेगा। यह प्रक्रिया बैंकों में लेन-देन सत्यापन की तरह होगी। जिससे भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।

सख्त कदम उठाने की जरूरत

नोएडा प्राधिकरण में प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह मामला दर्शाता है कि संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े कितने संगठित तरीके से किए जा रहे हैं। यदि इस तरह के मामलों पर कड़ी निगरानी नहीं रखी गई तो यह अन्य प्रॉपर्टी मालिकों के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए प्राधिकरण को और अधिक सख्त प्रक्रियाएं अपनाने की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रॉपर्टी का ट्रांसफर पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित हो सके।

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