इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9000 करोड़ के नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में सीबीआई को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के दिए निर्देश!: जानें क्या हैं नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाला जिसमें जमीन को बिल्डरों ने?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9000 करोड़ के नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में सीबीआई को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के दिए निर्देश!

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट में 9,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को मामला दर्ज करने और कार्रवाई करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर इस घोटाले में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी, बिल्डर या कोई और शामिल पाया जाता है तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने कामनवेल्थ गेम के लिए शुरू किए गए स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

क्या और कैसे हुआ ये घोटाला

दरअसल नोएडा प्राधिकरण ने 2004 में एक बड़ी योजना बनाई जिसमें शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए एक स्पोर्ट्स सिटी बनाई जाएगी का फैसला किया गया। जिसके लिए 311.60 हेक्टेयर जमीन तय की गई जिसे बाद में बढ़ाकर 346 हेक्टेयर कर दिया गया। बाद में 2010 में 150 हेक्टेयर में प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला लिया गया।

इसके तहत नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-78, 79, 101, 150 और 152 में चार बड़े बिल्डर ग्रुप थ्रीसी, लाजिक्स, जनाडू और एटीएस को बड़े भूखंड दिए गए थे। नियम यह था कि 70% जमीन खेल सुविधाओं के लिए होगी, 28% पर रिहायशी फ्लैट और 2% पर व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। लेकिन हुआ इसका उलटा। बिल्डरों ने खेल सुविधाओं का विकास करने के बजाय जमीन के 84 टुकड़े कर अलग-अलग बिल्डरों को बेच दिया। इनमें से 74 को नोएडा अथॉरिटी ने मंजूरी भी दे दी।

इतना ही नहीं नोएडा अथॉरिटी ने 46 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नक्शे भी पास कर दिए लेकिन बिल्डरों ने बकाया पैसा नहीं चुकाया। इस लापरवाही और मिलीभगत के कारण नोएडा अथॉरिटी को लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

नौ साल तक क्यों नहीं हुई कोई कार्रवाई?

इसमें गोल्फ कोर्स और क्रिकेट स्टेडियम समेत चार बड़े प्रोजेक्ट प्लान किए गए थे लेकिन कोई काम नहीं हुआ। ना तो खेल सुविधाओं का विकास हुआ और ना ही बिल्डरों ने नोएडा अथॉरिटी को भुगतान किया।

हैरानी की बात यह है कि सरकार और नोएडा अथॉरिटी को इस घोटाले की जानकारी थी फिर भी नौ साल तक किसी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। 2011 से 2020 तक यह घोटाला चलता रहा। जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ तब जाकर सरकार की नींद खुली।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर इस घोटाले में कोई भी दोषी पाया जाता है तो सीबीआई को तुरंत उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि खेल सुविधाओं के विकास का जो मकसद था वह पूरा हो सके।

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