डिफेन्स कॉरिडोर भूमि घोटाले पर सीएम योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश!: पहले से ही निलंबित चल रहे IAS समेत कई अन्य अधिकारियों पर...वही शामिल भूमाफियाओं को भी बख्शा नहीं जायेगा? जानें क्या है पूरा मामला
डिफेन्स कॉरिडोर भूमि घोटाले पर सीएम योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश!

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले मामले को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आपको बता दें कि सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र स्थापित करने वाली निवेशक कंपनी से कमीशन मांगे जाने की शिकायत के पश्चात निलंबित चल रहे इन्वेस्ट यूपी के CEO रहे अभिषेक प्रकाश के विरुद्ध अब डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले में भी कार्रवाई की जाएगी। 

तत्कालीन DM पहले ही निलंबित, अन्य कई अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई!

भूमि घोटाले में तत्कालीन DM अभिषेक प्रकाश के अतिरिक्त कुल 15 अन्य अधिकारियों को भी दोषी ठहराया गया है। जिनमें शामिल तत्कालीन एडीएम, 4 एसडीएम, 4 तहसीलदार, 1 नायब तहसीलदार, 3 कानूनगो व 2 लेखपालों के निलंबन के आदेश भी एक-दो दिन में ही जारी हो सकते हैं। 

सीएम योगी आदित्यनाथ के द्वारा इस घोटाले में शामिल भूमाफिया पर भी कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए गए हैं। खबर के अनुसार इनसे मुआवजे की राशि भी वसूल की जाएगी। वहीं सरोजनी नगर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात रहे कई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या था पूरा मामला:

आपको बता दें कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील में ग्राम पंचायत भटगांव की भूमि अधिग्रहण में किए गए घोटाले की जांच मुख्यमंत्री के द्वारा राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष डा. रजनीश दुबे से कराई गई थी। वहीं अगस्त 2024 में शासन को भेजी गई इस 83 पन्नों की जांच रिपोर्ट में डीएम अभिषेक प्रकाश समेत कुल 18 अधिकारियों को आरोपित बनाया गया था।

गौरतलब है कि डिफेंस कारिडोर में इकाइयों की स्थापना के लिए साल 2020-21 ब्रह्मोस मिसाइल के अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियां भूमि की तलाश कर रही थीं। इसके चलते ही भटगांव में भू-माफिया के द्वारा भूमि की दरें बढ़ा दी गई थीं। वहीं अधिकारियों के साथ में साठगांठ करके अधिग्रहण प्रक्रिया में दस्तावेजों में भी हेर फेर करके आवंटियों के नाम जोड़े गए थे। 

आरोपित अधिकारियों के द्वारा पट्टे की असंक्रमणीय श्रेणी की भूमि को भी संक्रमणीय घोषित कर दिया गया था। भूखंडों पर जिन लोगों का कब्जा था ही नहीं, उनको भी भूखंडों का मालिक बताया गया था। अधिकारियों के द्वारा मालिकाना हक की जांच के बिना ही उनको मुआवजा वितरित कर दिया गया था। भटगांव की करीब 35 हेक्टेयर भूमि हेतु करीब 45.18 करोड़ रुपये शासन ने स्वीकृत किए थे।

तत्कालीन अफसरों के द्वारा अपने रिश्तेदारों को दिलाई गई थी भूमि:

वहीं सरोजनी नगर तहसील के तत्कालीन अफसरों के द्वारा अपने रिश्तेदारों और नौकरों को भी भूमि दिलाई गई थी। भूमाफिया तथा अधिकारियों के द्वारा 20 करोड़ रुपये का मुआवजा हड़प लिया गया। भूमाफिया के द्वारा किसानों से 8 लाख रुपये में भूमि खरीद कर लगभग 54 लाख रुपये में बेची गई थी। 

वहीं जांच में 90 पट्टे फर्जी पाए गए थे। जिसमें 11 व्यक्तियों के नाम पट्टे में ही दर्ज नहीं थे। भूमाफिया के द्वारा 35 वर्ष पुराना पट्टा दिखा कर ही संक्रमणीय भूमिधर जमीन घोषित कराया गया था। वहीं घोटाले का राजफाश होने के पश्चात तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश के द्वारा कानूनगो जितेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

मंडलायुक्त ने इस घोटाले को बताया सुनियोजित षडयंत्र:

आपको बता दें कि प्रारंभिक जांच में मंडलायुक्त के द्वारा इस घोटाले को सुनियोजित षडयंत्र बताया गया था। बद्री के वारिसान रामकली के द्वारा बयान दिए गए थे कि रामसजीवन ने उन्हें 5 लाख रुपये देकर बैनामे पर अंगूठा लगवा लिया था। वहीं इसी प्रकार बाबूलाल की भूमि को 19 अगस्त 2021 कि तारीख को असंक्रमणीय घोषित की गई थी, जबकि उससे पूर्व ही सूरज मिश्रा को विक्रय अनुबंध कर दिया गया था। 

इसी प्रकार अंकित के वारिसान के द्वारा भूमि संक्रमणीय घोषित होने से पूर्व ही विक्रय अनुबंध कर लिया गया था। डिफेंस कॉरिडोर की सीमा के भीतर कुल 9 नंबरों (गाटा संख्या) तथा उस सीमा के बाहर करीब 31 नंबरों की जमीन ऐसी थी जो श्रेणी-5 (3 A) के अंतर्गत कृषि योग्य बंजर-इमारती लकड़ी के वन के रूप में दर्ज है। यानि इसे किसी निजी व्यक्ति के नाम नहीं किया जा सकता है।

खतौनी में नाम दर्ज किए बिना ही बेच दी गई जमीन:

इसके अतिरिक्त डिफेंस कॉरिडोर के लिए भूमि खरीदने वाली संस्था यानि यूपीडा को जिस विक्रेता के द्वारा जमीन बेची गई, बिक्री की तिथि को उसका नाम तक खतौनी में दर्ज नहीं किया गया था। विजय कुमार को 14 जून 2021 कि तारीख को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया गया। 

उन्होंने इस भूमि को लगभग 5.20 लाख रुपये में राजू को बेचा था। राजू के द्वारा वरुण कुमार मिश्रा एवं उनकी पत्नी सरिता सिंह को यह भूमि करीब 14.50 लाख रुपये में बेची गई थी, जिसे बाद में सरिता एवं वरुण ने 13 जुलाई को यूपीडा को लगभग 57.60 लाख रुपये में बेच दिया गया था।

अब इन अधिकारियों को किया जाएगा निलंबित:

तत्कालीन एडीएम (प्रशासन): अमरपाल सिंह

तत्कालीन 4 एसडीएम (SDM): शंभू शरण सिंह, आनंद कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार 

तत्कालीन 4 तहसीलदार: विजय कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, उमेश कुमार सिंह एवं मनीष त्रिपाठी

तत्कालीन नायब तहसीलदार: कविता ठाकुर

तत्कालीन 2 लेखपाल: हरीश्चंद्र व ज्ञान प्रकाश

तत्कालीन 3 कानूनगो: राधेश्याम, जितेंद्र सिंह एवं नैंसी शुक्ला।

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