उत्तर प्रदेश: साल 1989 बैच के IAS अधिकारी एस पी गोयल/शशि प्रकाश गोयल को उत्तर प्रदेश का अगला मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। बता दें कि एसपी गोयल ना केवल मुख्य सचिव की रेस में सबसे आगे हैं, बल्कि वह सबसे वरिष्ठ अधिकारी भी हैं। पिछले 8 वर्षों से अपर मुख्य सचिव एस पी गोयल सीएम योगी के प्रमुख सचिव तथा अपर मुख्य सचिव पंचम तल (मुख्यमंत्री कार्यालय) की क्रमशः कमान भी संभाल रहे हैं।
मौजूदा मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह जुलाई में हो रहे हैं रिटायर!
दरअसल उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह इसी वर्ष जुलाई माह में रिटायर हो जाएंगे। इसको लेकर शासन में होली के हुड़दंग के बीच में ही नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि मनोज कुमार सिंह के पश्चात अब एसपी गोयल ही सूबे के नए मुख्य सचिव बनाए जाएंगे।
आपको बता दें कि एसपी गोयल को लेकर पिछले वर्ष केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का रास्ता लगभग साफ हो गया था, लेकिन उनको मुख्य सचिव बनाए जाने की योजना के अंतर्गत ही उत्तर प्रदेश में रोक लिया गया था।
आइए विस्तार से जानते हैं एसपी गोयल के अब तक के कार्यकाल के बारे में:
दरअसल एसपी गोयल साल 1989 बैच के एक आईएएस अफसर हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के आईएएस अफसरों की सीनियरिटी लिस्ट में साल 1987 बैच के अरुण सिंघल (वर्तमान मैं वह भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं) तथा साल 1988 बैच के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ही उनसे से सीनियर हैं।
इसके साथ ही एसपी गोयल जनवरी 2027 में रिटायर होंगे। वहीं सीनियरिटी लिस्ट में साल 1989 बैच में देवेश चतुर्वेदी को छोड़कर वर्तमान के सभी अफसर इसी साल रिटायर हो जाएंगे। हालांकि साल 1990 बैच तक के अफसर भी गोयल से पूर्व ही रिटायर हो जाएंगे।
आपको बता दें कि एसपी गोयल सबसे पहले साल 1990 में इटावा के असिस्टेंट मजिस्ट्रेट बने थे। इसके बाद वह मेरठ, बहराइच तथा अलीगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी भी रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह देवरिया, मथुरा समेत इटावा, प्रयागराज तथा अलीगढ़ के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं।
वहीं बसपा की मायावती सरकार में उनके सबसे ताकतवर अफसर रहे कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के स्टाफ में भी वह अफसर रहे। इसके साथ ही सपा की अखिलेश यादव सरकार में भी वह प्लानिंग विभाग में सचिव एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग में प्रमुख सचिव रह चुके हैं।
इसी प्रकार मोदी सरकार 1.0 में तत्कालीन मानव संसाधन तथा उच्च शिक्षा मंत्री रहीं स्मृति ईरानी के मंत्रालय में भी संयुक्त सचिव के रूप में काम कर चुके हैं।
वहीं मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर गोयल मई 2017 में सीएम योगी के प्रमुख सचिव नियुक्त किए गए। तब से लेकर अभी तक वह इसी पद पर मौजूद हैं। उनके पास नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव तथा एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर उत्तर प्रदेश का भी कार्यभार है।
PMO से भी अच्छे हैं गोयल के रिश्ते:
दरअसल कुछ जानकार ऐसा मानते हैं कि एसपी गोयल का PMO अर्थात प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ साथ भारत सरकार के गृह मंत्रालय सहित अधिकांश मंत्रालयों के सचिवों के साथ में भी अच्छे रिश्ते हैं। यही वजह है कि योगी सरकार जिस किसी भी मामले को लेकर केंद्र सरकार से मंजूरी चाहती है वह उन्हें जल्द से जल्द मिल जाती है।
यदि मनोज सिंह का कार्यकाल बढ़ा तो एसपी गोयल को करना होगा इंतजार:
हालांकि अफसरों का मानना है कि मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह जुलाई 2025 में रिटायर हो जाएंगे। लेकिन सीएम योगी के द्वारा यदि व्यक्तिगत स्तर पर मनोज सिंह का कार्यकाल बढ़ाने की संस्तुति प्रधानमंत्री मोदी से की गई तो उनका कार्यकाल 6 महीने से लेकर एक साल तक बढ़ाया जा सके है।
अगर ऐसा होता है एसपी गोयल को एक बार फिर से इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि कई अफसरों का यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा बीते 8 वर्षों में किसी भी अफसर के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर कोई संस्तुति नहीं की गई है।
दीपक कुमार भी हैं इस पद के प्रबल दावेदार:
आपको बता दें कि अगर हम एसपी गोयल के पश्चात इस पद के लिए किसी अन्य की बात करें तो सबसे प्रबल दावेदार के रूप में दीपक कुमार का नाम आता है। दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार भी मुख्य सचिव पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं।
अफसरों का मानना है कि दीपक कुमार सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी तथा विश्वसनीय अफसर हैं। हालांकि वरिष्ठा के आधार पर वह एसपी गोयल से पीछे हैं। लेकिन शासन में चर्चा है कि यदि एसपी गोयल मुख्य सचिव बनाए गए तो पंचम तल पर गोयल की जगह मुख्यमंत्री तथा गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ले लेंगे।
किसी के दबाव में कोई काम नहीं करते हैं एसपी गोयल:
उत्तर प्रदेश से लेकर भारत सरकार तक देखें तो एसपी गोयल की छवि निडर एवं बेबाक अफसर की तरह है। गोयल के साथ काम कर चुके कई आईएएस अफसर बताते हैं कि वह कभी भी किसी के दबाव में नहीं करते हैं। वह हमेशा सही को सही तथा गलत को गलत कहने और करने की भी हिम्मत रखते हैं।
इसका सबसे ताजा उदाहरण है कि साल 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी माने जाने वाले जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के द्वारा सिंचाई विभाग के साढ़े सात सौ सहायक इंजीनियर्स के ट्रांसफर की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई थी। लेकिन गोयल को इतनी बड़ी संख्या में इंजीनियर्स के तबादले तार्किक नहीं लगे और उन्होंने ट्रांसफर की फाइल को कई बार वापस लौटा दिया।
इसी उड़कर वहीं सैमसंग इंडिया को निर्धारित सब्सिडी से ज्यादा सब्सिडी देने वाली फाइल पर भी गोयल द्वारा सहमति नहीं दी गई थी। हर महीने ऐसे एक-दो छोटे व बड़े उदाहरण देखने को मिल जाते हैं, जब किसी फाइल में थोड़ी भी चूक नजर आ जाए तो उस पर गोयल बगैर किसी दबाव में आए आपत्ति लगाकर लौटा देते हैं।
जेवर एयरपोर्ट को धरातल पर उतारने में गोयल की रही बड़ी भूमिका:
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में यूं तो जेवर एयरपोर्ट का प्लान बसपा की मायावती सरकार में ही शुरू हो गया था। लेकिन उसके पश्चात यह प्लान सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गया था। वहीं गोयल के नागरिक उड्डयन विभाग के प्रमुख सचिव की बागडोर संभालने के पश्चात उन्होंने जेवर एयरपोर्ट की योजना को वास्तविकता में धरातल पर उतारने का काम किया।
इसके अतिरिक्त जेवर एयरपोर्ट के ड्राइंग एंड डिजाइन से लेकर भूमि अधिग्रहण कराने तक, जेवर एयरपोर्ट के लिए SPV यानि स्पेशल परपज व्हीकल तैयार करने समेत ग्लोबल टेंडर कराने तक में भी एसपी गोयल की बड़ी भूमिका रही है।
यूपी में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट्स की संख्या बढ़ कर हुई 4:
एसपी गोयल के कार्यकाल में ही उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की संख्या 2 से बढ़कर 4 (लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर) पहुंच गई है। वहीं यूपी में अब आगरा, गोरखपुर, बरेली, हिंडन, प्रयागराज, कानपुर तथा मुरादाबाद में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुए हैं।
जबकि अलीगढ़, चित्रकूट, आजमगढ़, सोनभद्र, झांसी, ललितपुर, पलिया, सहारनपुर और श्रावस्ती में भी एयरपोर्ट निर्माण की दिशा में लगातार तेजी से काम किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ के विश्वसनीय तथा करीबी हैं गोयल:
एक पूर्व मुख्य सचिव यह बताते हैं कि एसपी गोयल सीएम योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी तथा विश्वसनीय अफसर भी हैं। आईएएस (IAS) लॉबी में पंचम तल से लेकर पूर्व मुख्य सचिव तथा अपर मुख्य सचिव रहे अफसरों समेत सरकार के कई दिग्गज मंत्रियों के द्वारा उन्हें घेरने की कई बार कोशिश की गई और कई बार झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश भी की गई।
लेकिन सीएम योगी की नजर में उनकी विश्वसनीयता एवं उपयोगिता के चलते वह कुछ नहीं बिगाड़ सके। वह आगे बताते हैं कि गोयल की वजह से ही सत्ता पक्ष एवं विपक्ष पंचम तल पर उंगली नहीं उठा पाते हैं। इतना ही नहीं सीएम योगी द्वारा भी किसी गलत फाइल पर दस्तखत नहीं किए गए हैं। यूपी में आईएएस अफसरों की तैनाती में बीते 8 वर्षों में गोयल की ही बड़ी भूमिका रही है।
सबसे ताकतवर मुख्य सचिव साबित होंगे एसपी गोयल:
आपको बता दें कि शासन के कई अधिकारी मानते हैं कि यदि एसपी गोयल मुख्य सचिव बनाए गए तो वह योगी सरकार में अब तक के सबसे ज्यादा ताकतवर मुख्य सचिव साबित होंगे। दरअसल आमतौर पर मुख्य सचिव कार्यालय से लेकर शासन के सभी विभागों में पंचम तल की ही हनक ज्यादा रही है।
वहीं गोयल खुद 8 वर्षों से पंचम तल की कमान संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि वह यूपी के एक-एक आईएएस, आईपीएस तथा आईएफएस की क्षमता को भी जानते हैं। सरकार के मंत्रियों तथा विधायकों से भी उनका सीधा सीधा संवाद होता है। पंचम तल पर भी अधिकांश अफसरों की पोस्टिंग उनकी हु पसंद से की गई है।
गोयल बने मुख्य सचिव तो ब्यूरोक्रेसी हो जाएगी बहुत हावी:
यूपी में सत्तापक्ष के विधायक तथा मंत्री खुलेआम यह कहते हैं कि नौकरशाही बहुत हावी है। जिलों में जिलाधिकारी तथा पुलिस कप्तान विधायकों और सांसदों की बिल्कुल नहीं सुनते। ऐसा माना जाता है कि जब-जब किसी IAS की शिकायत सीएम के सामने पहुंचती है तो कोई ठोस सबूत नहीं होने पर एसपी गोयल ही उनकी ढाल बनकर बचाव करते हैं।
वहीं अब एसपी गोयल के मुख्य सचिव बनने से ब्यूरोक्रेसी जनप्रतिनिधियों पर अधिक हावी हो जाएगी। इससे जनप्रतिनिधियों तथा भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी बढ़ सकती है। सरकार को अगले वर्ष चुनावी मैदान में भी उतरना है, वहीं अगर ब्यूरोक्रेसी हावी हुई तो उसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ सकता है।