लोकसभा में पारित हुआ आव्रजन विधेयक 2025: गृह मंत्री ने विपक्ष को लिया आड़े हाथ, भारत कोई धर्मशाला नहीं देश की सुरक्षा के लिए रखेंगे नजर और?
लोकसभा में पारित हुआ आव्रजन विधेयक 2025

नई दिल्ली: लोकसभा में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पर चर्चा के पश्चात गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा बिल के प्रावधानों पर विस्तार से जवाब दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत में आने के लिए अब वैध पासपोर्ट और वैध वीजा अनिवार्य होगा। 

अतः बिना कागजात के भारत में प्रवेश करने वालों पर कानून सम्मत तरीके से सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री के द्वारा सख्ती से कहा गया कि जाली दस्तावेजों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी देश में रहने वालों को ट्रैक किया जाएगा।

लोकसभा से पारित हुआ विधेयक:

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा दिए गए जवाब के पश्चात आज यानि गुरुवार शाम करीब 6.20 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के द्वारा इस विधेयक को पारित होने का एलान किया गया। पहले स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों पर मतदान करने की भी औपचारिकताएं पूरी कीं। वहीं विपक्षी सांसदों की तरफ से पेश किए गए अधिकांश संशोधन खारिज कर दिए गए।

सरकार के पास लोगों के दस्तावेजों की जांच करने का है पूरा अधिकार:

आपको बता दें कि अमित शाह के द्वारा विपक्ष को आड़े हाथों लिया गया और कहा गया कि जिस तरह के सवाल संसद में विपक्ष के द्वार पूछे गए हैं, उनसे मुझे काफी हैरानी होती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता के द्वारा भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया गया है।

इस प्रकार हमने बहुमत की सरकार बनाई है और ऐसे में सरकार के पास इस बात का पूरा अधिकार है कि विदेशी लोगों की घुसपैठ और भारत आने वाले लोगों के पास वैध कागजात हैं अथवा नहीं, इसकी जांच कर सके। देश की सुरक्षा के लिए किसी से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन कोई आइसोलेटेड मुद्दा नहीं है। भारत देश की सीमा में कौन आता है, कब आता है और कितनी अवधि तक आता है तथा किस उद्देश्य से आता है, यह सब कुछ जानने का अधिकार देश की सरकार के पास में है और ऐसा करना सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है।

घुसपैठ मामले में पश्चिम बंगाल सरकार पर लगाए गंभीर आरोप:

वहीं पश्चिम बंगाल में साल 2026 का विधानसभा चुनाव जीतने का दावा करते हुए गृह मंत्री शाह के द्वारा कहा गया कि राज्य सरकार की कृपादृष्टि के कारण ही 450 किलोमीटर की सीमा अभी तक असुरक्षित है, लेकिन यह सब लंबे समय तक नहीं चलेगा। शाह के द्वार कहा गया कि वह खुद 10 बार पत्र भेजकर राज्य सरकार से अपील कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सहयोग नहीं किया जा रहा है। 

उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब यही निकलता है कि राज्य सरकार घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति रखती है और इसलिए ही उन्हें आधार कार्ड दिए जाते हैं। लेकिन उनके इन्हीं कारणों से देश की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

भारत में दुनिया की सबसे सूक्ष्म अल्पसंख्यक आबादी भी सुरक्षित:

इसके अतिरिक्त दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा कहा गया कि 'भारत का शरणार्थियों के प्रति एक समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास रहा है। पारसी समुदाय हमारे देश में शरण लेने आये थे और वह आज भी पूर्णतः सुरक्षित हैं। दुनिया की सबसे सूक्ष्म अल्पसंख्यक आबादी भी आज भारत में सुरक्षित एवं सम्मान से जीवन जी रही है।'

ऐसा होने पर भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी:

आपको बता दें कि इस विधेयक के कानून बनने के पश्चात भारत में आने वाले लोगों का संपूर्ण, व्यवस्थित, एकीकृत एवं अप-टू-डेट लेखा-जोखा होगा। इस विधेयक की धारा 3 में प्रवेश निषेध का भी प्रावधान है। इसके अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा अथवा देश की साख के लिए खतरा पाया जाता है, तो उसे भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, भारत कोई धर्मशाला नहीं:

उन्होंने आगे कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां पर कोई भी व्यक्ति किसी भी उद्देश्य से आकर बस जाए। जो भी इस देश की सुरक्षा के लिए खतरा होगा, उसे रोकने का अधिकार संसद के पास में है। साथ ही साथ यह विधेयक सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा बनाई गयी ब्लैक लिस्ट को भी कानूनी प्रावधान देगा। 

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि आप्रवास संबंधी पुराने तीनों विधेयक 1920, 1939 तथा 1946 ब्रिटेन की संसद में बनाए गए थे। इसलिए आज हमारी पूरी आप्रवास नीति नए भारत की नई संसद भवन में बनने जा रही है और यह हमारे लिए बेहद गौरव की बात है।

आखिर क्यों जरूरी है यह विधेयक:

गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग व्यापार, शिक्षा एवं निवेश के लिए भारत आते हैं, उनका यहां स्वागत है, लेकिन जो हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बनेंगे हमारी उन पर कड़ी और सख्त निगरानी रहेगी। यह विधेयक इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि देश की सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, मैन्युफैक्चरिंग तथा व्यापार को बढ़ावा देने, शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने समेत हमारे विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के लिए भी आप्रवास एवं विदेशियों विषयक विधेयक 2025 बेहद जरूरी हो जाता है।

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