लाइफस्टाइल: स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद जगी है। एम्स के विशेषज्ञ ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे बिना सर्जरी ही कैंसर का इलाज संभव हो सकेगा। इस तकनीक में रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाएगा जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर देगी ताकि ऑपरेशन की जरूरत न पड़े।
आज भी कई महिलाएं कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी को लेकर डरती हैं या झिझकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज के ये तरीके लगातार बेहतर हो रहे हैं जिससे शुरुआती चरण में ही कैंसर को काबू में किया जा सकता है। अगर समय रहते इसका पता चल जाए तो सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी जिससे महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
स्तन कैंसर के बढ़ते मामले
पिछले 25 सालों में भारत में स्तन कैंसर के मामलों में तेजी आई है। हर साल लगभग 14 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं जिनमें करीब 2 लाख सिर्फ स्तन कैंसर के होते हैं। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है। 30 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में करीब 30% मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वी. के. बंसल बताते हैं कि उनकी टीम स्तन कैंसर के नए और ज्यादा प्रभावी इलाज पर शोध कर रही है। अगर बीमारी का जल्द पता चल जाए तो इलाज ज्यादा सफल होता है और महिलाओं को जटिल सर्जरी से बचाया जा सकता है।
महिलाएं ब्रेस्ट से रिलेटेड समस्याओं को शर्मिंदगी से जोड़ती हैं
स्तन से जुड़ी समस्याओं को लेकर एम्स ने "एबीसी" (अवेयरनेस ब्रेस्ट कंडीशंस) नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत विशेष क्लीनिक भी खोले गए हैं जहां महिलाएं अपनी समस्याओं का समाधान पा सकती हैं। डॉ. मनीष सिंघल जो एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख हैं वो बताते हैं कि 50-60% महिलाएं अपने जीवन में कभी न कभी स्तन से जुड़ी समस्याओं का सामना करती हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 10% महिलाएं ही इलाज करवाने के लिए आगे आती हैं।
भारत में 32% महिलाएं स्तन जांच कराने से कतराती हैं क्योंकि वे इसे शर्मिंदगी से जोड़कर देखती हैं। यह चिंता का विषय है क्योंकि आज के दौर में स्तन से जुड़ी लगभग हर समस्या का इलाज संभव है।
सर्जरी भी एक विकल्प
स्तन कैंसर के अलावा कई महिलाओं को असमान आकार, बड़े या छोटे स्तन, अधिक ढीले स्तन या ट्यूबरस स्तन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन मामलों में सर्जरी एक अच्छा समाधान हो सकता है।
कई बार स्तन में गांठें भी बन जाती हैं जिससे महिलाएं डर जाती हैं। हालांकि डॉक्टरों के अनुसार 90% गांठें कैंसर रहित होती हैं। फिर भी समय पर जांच कराना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।
प्लास्टिक सर्जरी की बढ़ती मांग
डॉ. शिवांगी साहा के अनुसार स्तन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्लास्टिक सर्जरी की मांग 30% तक बढ़ गई है। यह तकनीक खासतौर पर उन महिलाओं के लिए मददगार साबित हो रही है जो कैंसर के कारण अपने स्तन गंवा चुकी हैं या फिर किसी अन्य कारण से उनके आकार को सुधारना चाहती हैं।
क्या करें महिलाएं?
स्तन कैंसर और अन्य समस्याओं के इलाज के नए विकल्प अब उपलब्ध हैं। बिना सर्जरी रेडियोथेरेपी से इलाज की संभावना महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। साथ ही प्लास्टिक सर्जरी और अन्य आधुनिक तकनीकों से भी महिलाओं को उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।