नोएडा: नोएडा प्राधिकरण ने अपने रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पहले इस योजना में केवल नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर को शामिल किया गया था लेकिन अब इसमें और विस्तार किया गया है। अब इस योजना में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, न्यू नोएडा और लॉजिस्टिक हब को भी जोड़ा जाएगा ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिल्ली से जाम मुक्त और बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। यह प्लान आने वाले 50 वर्षों के लिए तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके।
प्राधिकरण की योजना और सलाहकार कंपनी का चयन
नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल के अनुसार इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक सलाहकार कंपनी का चयन किया जाएगा। इसके लिए दोबारा से आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की जाएगी। आरएफपी जारी करने से पहले सभी संबंधित प्राधिकरणों और ट्रैफिक विभाग के साथ बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें योजना के संशोधित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पहले चरण में सात कंपनियों ने इस परियोजना में रुचि दिखाई थी लेकिन अब योजना के विस्तार के कारण इसमें और अधिक कंपनियों के शामिल होने की संभावना है।
योजना का मुख्य उद्देश्य और इसके लाभ
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति देना है। जब यह योजना लागू हो जाएगी तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और न्यू नोएडा जैसे शहरों को बेहतर सड़कों, चौड़े फ्लाईओवर, बॉटलनेक समाधान और उन्नत ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाएगा। मास्टर प्लान 2031 के तहत प्रस्तावित सभी मोबिलिटी उपायों को इस योजना के माध्यम से लागू किया जाएगा। सलाहकार कंपनी यह भी सुनिश्चित करेगी कि योजना किस प्रकार से लागू की जाएगी।
क्षेत्रीय योजनाओं का अध्ययन और डीपीआर में समावेश
प्राधिकरण ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत न्यू नोएडा, लॉजिस्टिक हब और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे नए विकसित क्षेत्रों के लिए विशेष मोबिलिटी प्लान तैयार किए जाएंगे। सलाहकार कंपनी इन क्षेत्रों के मौजूदा योजनाओं का गहन अध्ययन करेगी और उनमें से सर्वोत्तम सुझावों को डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में शामिल करेगी। इसके लिए कंपनी को विशिष्ट समय सीमा दी जाएगी और कंपनी को उसी समय के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
50 वर्षों के लिए तैयार होगी दीर्घकालिक योजना
यह योजना एक प्रकार का दीर्घकालिक थिंक टैंक होगी जिसमें विभिन्न शहरों के अधिकारी और सलाहकार कंपनियां मिलकर अध्ययन करेंगी कि कैसे दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच अगले 50 वर्षों तक जाम-मुक्त कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके। इस योजना में प्राप्त होने वाले सभी सुझावों को एकत्रित कर संबंधित प्राधिकरण के सहयोग से कार्यान्वयन किया जाएगा। इस विषय पर हाल ही में नोएडा के एक होटल में विस्तृत बैठक भी आयोजित की जा चुकी है।
नौ प्रमुख बिंदुओं पर आधारित होगा रीजनल प्लान
1. स्थानीय प्राधिकरणों से होगी चर्चा: सबसे पहले सलाहकार कंपनी स्थानीय प्लानिंग सेल के साथ चर्चा करेगी और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसमें भूमि उपयोग, सड़क नेटवर्क और आर्थिक संरचना को शामिल किया जाएगा।
2. डेटा एनालिसिस: सभी प्रकार के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा,जिसमें सामाजिक ढांचा, पंजीकृत वाहनों की संख्या, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, अर्बन ट्रांसपोर्ट नीतियां, सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े, और भूमि उपयोग मैप्स शामिल होंगे।
3. प्राथमिक सर्वेक्षण: प्रारंभिक सर्वेक्षण के जरिए योजना के लिए आवश्यक डेटा एकत्र किया जाएगा।
4. हितधारकों की भागीदारी: योजना पर सार्वजनिक और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि सभी के विचारों को ध्यान में रखा जा सके।
5. विस्तृत सर्वेक्षण: इसमें ट्रैफिक पैटर्न, सड़क की चौड़ाई, पार्किंग की उपलब्धता, पैदल यात्रियों की सुरक्षा आदि से संबंधित आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे।
6. प्रदूषण पर ध्यान: योजना में पर्यावरणीय प्रभावों का भी विश्लेषण किया जाएगा, जिसमें डीजल, पेट्रोल, एलपीजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग का असर देखा जाएगा।
7. ई-बसों का संचालन: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में ई-बसों के संचालन का प्रस्ताव भी इस योजना में शामिल होगा। इसके लिए चार्जिंग स्टेशन, डिपो और कार्यशालाएं विकसित की जाएंगी।
8. सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी: सड़क नेटवर्क, इंटरकनेक्टिविटी, पार्किंग सुविधाओं और सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
9. अंतिम ड्राफ्ट और अनुमोदन: सभी बिंदुओं के अध्ययन के बाद अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा और इसे समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। प्राधिकरण की मंजूरी के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा।
नोएडा के इस रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का लक्ष्य है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिल्ली से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी को अगले 50 वर्षों के लिए मजबूत और सतत बनाया जाए। योजना के तहत तैयार की जाने वाली सड़कों, फ्लाईओवर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट से न केवल जाम की समस्या कम होगी बल्कि क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को भी नया आयाम मिलेगा।