ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के द्वारा सभी किसानों को एक बड़ी खुशखबरी दी गई है। दरअसल किसानों की समस्याओं तथा भू आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्राधिकरण के द्वारा एक नया ऑनलाइन ऐप विकसित किया जा रहा है।
इस नए सॉफ्टवेयर ऐप के माध्यम से भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया को और अधिक तेज बनाया जा सकेगा। आपको बता दें कि यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी जाएगी, ताकि आवेदन करने तथा मंजूरी मिलने के काम को प्रभावी एवं अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
किसानों को मिलेंगी कई प्रकार की सुविधाएं:
1)आपको बता दें कि इस नई प्रणाली के माध्यम से सभी किसान अपनी पात्रता ऑनलाइन तरीके से दर्ज कर सकेंगे।
2)वहीं जब किसानों का आवेदन मंजूर कर लिया जाएगा तो वह ऐप के द्वारा अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक भी कर सकेंगे।
3)किसानों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां तथा दिशा-निर्देश समेत भूखंड के सबडिवीजन के बारे में भी जानकारी ऐप के द्वारा मिल सकेंगी।
4)इस ऐप के आ जाने के बाद किसानों को बार-बार ऑफिस जाने की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।
5)इस ऐप के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि के अधिग्रहण के बदले में 4 प्रतिशत, 6 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत भूखंड भी आवंटित किए जाएंगे।
प्राधिकरण के अधिकारियों को भी मिलेंगे कई फायदे:
दअरसल इस पूरे सॉफ्टवेयर को ग्रेनो प्राधिकरण के अधिकारियों की आवश्यकताओं के अनुसार भी डिजाइन किया जाएगा। इसमें सीनियर मैनेजर (प्रोजेक्ट तथा प्लानिंग), ओएसडी (लैंड), असिस्टेंट मैनेजर (प्लानिंग) एवं मैनेजर (6% आबादी भूखंड) जैसे कई अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने के लिए इस ऐप को एक्सेस कर सकेंगे।
बता दें कि प्राधिकरण के यह सभी अधिकारी इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से भूखंड के आवेदन को मंजूरी देने तथा सबडिवीजन की स्वीकृति प्रदान करने समेत लैंड रिकॉर्ड्स का प्रबंधन करने जैसे कई कार्यों को बेहद आसानी के साथ कर सकेंगे।
किसानों की समस्याओं का होगा सकेगा त्वरित समाधान:
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के क्षेत्र में अभी तक तकरीबन 4000 किसानों को उनके आबादी भूखंड नहीं मिल पाए हैं। हालांकि इस समस्या के समाधान के लिए पिछले वर्ष बनी हाईपावर कमेटी के द्वारा 6 महीने के अंदर प्रभावित सभी किसानों को विकसित भूखंड देने की सिफारिश की गई थी।
लेकिन इसके पश्चात तीनों प्राधिकरणों (यमुना प्राधिकरण, नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण) के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक नई समिति का गठन किया गया था, जो आवंटन प्रक्रिया को फिलहाल तेजी से लागू करने पर लगातार काम कर रही है। लेकिन अब इस ऐप के आने के बाद किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा।
तीनों प्राधिकरणों की अलग नीतियों की वजह से पड़ी जरूरत:
दरअसल गौतम बुद्ध नगर में मौजूद तीनों प्राधिकरणों की नीतियां अलग अलग हैं। जिस कारण किसानों को काफी भेदभाव और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं किसानों के द्वारा लगातार इनमें एकरूपता लाने की बात की जाती रही है।
इसी क्रम में अब यह ऑनलाइन सॉफ्टवेयर किसानों की इन समस्याओं में सुधार कर सकता है। जैसे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के द्वारा अधिग्रहीत भूमि के बदले में 6% आबादी भूखंड आवंटित किया जाता है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण के द्वारा यह 5% तथा यमुना विकास प्राधिकरण में यह 7% है।
फिलहाल अब तक कई किसानों को उनके भूखंडों पर कब्जा नहीं मिल पाया है। वहीं समिति की सिफारिशों के पश्चात कुछ शिविर भी आयोजित किए गए थे लेकिन बहुत से किसान अभी भी भूखंडों से वंचित हैं। जिसमें यह सॉफ्टवेयर काफी लाभकारी सिद्ध होगा।
इनोवेटिव समाधान देने वाले स्टार्टअप्स को दी जाएगी छूट:
दअरसल प्राधिकरण के द्वारा सॉफ्टवेयर विकास के लिए कंपनियों तथा स्टार्टअप से 16 जनवरी तक आवेदन मांगे गए हैं। वहीं इस परियोजना में नए तथा इनोवेटिव समाधान देने वाले सभी स्टार्टअप्स को पात्रता मानदंड में छूट भी दी जाएगी। इससे सॉफ्टवेयर के विकास में और तेजी आएगी तथा बेहतर गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
किसानों के लिए राहतभरी साबित होगी यह पहल:
आपको बता दें कि प्राधिकरण के अधिकारियों का यह मानना है कि किसानों के लिए यह पहल काफी राहतभरी साबित हो सकेगी, क्योंकि यह टेक्नॉलॉजी के उपयोग के माध्यम से किसानों की समस्याओं को दूर करने का एक बेहद ठोस कदम है।
वहीं इस सॉफ्टवेयर के लागू होने के पश्चात भूखंड आवंटन प्रक्रिया में पहले से अधिक पारदर्शिता तथा सरलता भी आएगी। इसके द्वारा किसानों को बिना किसी प्रकार की बाधा के उनके अधिकार भी मिल जाएंगे तथा प्राधिकरण का प्रशासनिक कामकाज भी तेज तथा प्रभावी हो सकेगा।