2027 तक एयर टैक्सी बदल देगी यात्रा का तरीका!: दिल्ली से गुरुग्राम पहुंचने में लगेंगे सिर्फ 7 मिनट, कंपनी ने भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में अपने मॉडल का किया प्रदर्शन
2027 तक एयर टैक्सी बदल देगी यात्रा का तरीका!

नोएडा: भारत में 2027 तक एयर टैक्सी और एयर कार्गो सेवाओं की शुरुआत हो जाएगी। इन सेवाओं में एयर टैक्सी 4 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी जबकि एयर कार्गो ड्रोन 550 किलोग्राम तक का सामान ढोने में सक्षम होगा। इन आधुनिक तकनीकों को भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में प्रदर्शित किया गया जो 19 जनवरी से ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में सी हॉर्स एयर लिमिटेड और ब्लू जे एयरो ने अपनी नवीनतम VTOL (वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग) तकनीक आधारित एयरक्राफ्ट पेश किए।

VTOL टेक्नोलॉजी: एयर टैक्सी और कार्गो का नया युग

वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट को संचालित करने के लिए खास वर्टीपोर्ट्स बनाए जा रहे हैं। इनकी मदद से शहरों को न केवल एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा बल्कि एयर टैक्सी, कार्गो सेवाएं, एयर एम्बुलेंस, सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन और कोस्ट गार्ड की गतिविधियों को भी तेज और कुशल बनाया जाएगा।

ब्लू रे: नीलकंठ VTOL ड्रोन की विशेषताएं

ब्लू रे एयरो द्वारा विकसित यह VTOL ड्रोन "नीलकंठ" के नाम से जाना जाएगा। कंपनी के संस्थापक अमर के अनुसार यह एक प्रकार का एयर टैक्सी और कार्गो ड्रोन है। इसका परीक्षण जारी है और 2028-29 तक इसे व्यावसायिक रूप से लॉन्च कर दिया जाएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह एक बार ईंधन चार्ज करने के बाद 300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है और 100 से 550 किलोग्राम तक का भार वहन कर सकता है।

सी हॉर्स एच-5: पानी और शिप पर ऑपरेट होने वाला VTOL ड्रोन

सी हॉर्स एयर लिमिटेड ने अपने सी हॉर्स एच-5 मॉडल को पेश किया है जो पानी पर लैंड और टेकऑफ करने में सक्षम है। इसे विशेष रूप से समुद्री क्षेत्रों और शिप पर उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। इस एयरक्राफ्ट के लिए बड़े स्थान की जरूरत नहीं होती यह एक छोटे हेलीपैड जितने स्थान पर भी आसानी से काम कर सकता है। इसकी रेंज लगभग 450 किलोमीटर है और अधिकतम गति 150 किमी/घंटा है। यह 550 किलोग्राम तक का कार्गो ले जा सकता है।

हर मौसम में काम करने की क्षमता

सी हॉर्स के वरिष्ठ डिजाइनर अभिषेक के मुताबिक सी हॉर्स एच-5 को हर मौसम में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह कॉस्टल क्षेत्रों में न केवल सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उपयोगी होगा बल्कि आवश्यक सामान और सहायता पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की सीमाओं का बड़ा हिस्सा समुद्र से जुड़ा होने के कारण यह तकनीक देश के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकती है।

एयर टैक्सी: बड़े शहरों को जोड़ने की तैयारी

एयर टैक्सी सेवाएं शुरुआत में देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में शुरू की जाएंगी। इन शहरों के बीच VTOL फ्लाइट्स से सफर करना न केवल तेज होगा बल्कि समय और ऊर्जा की भी बचत होगी। उदाहरण के लिए दिल्ली से गुरुग्राम की दूरी जो सड़क मार्ग से 60-90 मिनट में तय होती है एयर टैक्सी के माध्यम से मात्र 7-8 मिनट में पूरी हो जाएगी। इसी तरह बेंगलुरु और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के बीच की 51 किलोमीटर की दूरी एयर टैक्सी के जरिए मात्र 19 मिनट में तय हो सकेगी।

वर्टीपोर्ट: VTOL टेक्नोलॉजी का केंद्र

वर्टीपोर्ट एक विशेष प्रकार का हवाई अड्डा है जो विशेष रूप से वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट के लिए डिजाइन किया जाता है। सामान्य रनवे के विपरीत, वर्टीपोर्ट पर VTOL एयरक्राफ्ट सीधे ऊपर उड़ान भर सकते हैं और लैंड कर सकते हैं। इसके साथ ही इन वर्टीपोर्ट्स पर इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट के लिए चार्जिंग स्टेशन भी उपलब्ध होंगे।

भविष्य की योजनाएं

इन VTOL एयर टैक्सी और कार्गो ड्रोन को व्यावसायिक रूप से 2027 तक लॉन्च करने की योजना है। इनका उद्देश्य न केवल तेज और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करना है बल्कि लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन सेवाओं में भी क्रांति लाना है। इनका उपयोग कोस्टल एरिया में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सामान की डिलीवरी के लिए किया जा सकता है।

एयर टैक्सी और VTOL कार्गो ड्रोन तकनीक भारत में परिवहन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। 2027 तक इनकी लॉन्चिंग से न केवल सफर का अनुभव बदलेगा बल्कि देश की आपूर्ति शृंखला और आपातकालीन सेवाओं में भी तेजी आएगी। भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में पेश किए गए इन मॉडल्स ने भविष्य के परिवहन की झलक पेश की है जो न केवल समय की बचत करेंगे बल्कि एक सतत और उन्नत भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।

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