गाजियाबाद: जिले में अब घर का नक्शा पास कराना पहले से अधिक सरल हो गया है। जीडीए (गाजियाबाद विकास प्राधिकरण) ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। अब यदि किसी व्यक्ति के पास राजस्व विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) उपलब्ध है तो उसे नगर निगम से एनओसी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
बैठक में लिया गया अहम फैसला
जीडीए के उपाध्यक्ष अतुल वत्स की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित एक बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में शहर की समस्याओं पर चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए सुझाव दिए गए। बैठक का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को अधिक सुविधाएं प्रदान करना और विकास कार्यों में तेजी लाना था।
संपत्तियों का हो रहा ऑडिट
जीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि प्राधिकरण की योजनाओं के तहत भूखंडों और अन्य संपत्तियों की जानकारी एकत्र की जा रही है। कौशांबी, इंदिरापुरम और प्रताप विहार जैसे क्षेत्रों में जीडीए की संपत्तियों का ऑडिट किया जा रहा है। खास बात यह है कि कौशांबी में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की खाली संपत्ति पाई गई है। इस संपत्ति के विकास के लिए योजना तैयार की जा रही है।
वसीयत के आधार पर नाम दर्ज प्रक्रिया हुई आसान
रजिस्टर्ड वसीयत के आधार पर संपत्ति का नाम दर्ज कराने के लिए अब वारिसान की एनओसी की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से संपत्ति नामांतरण की प्रक्रिया और अधिक सरल हो गई है। जीडीए ने स्पष्ट किया कि ऐसी बैठकों का आयोजन अब हर सप्ताह किया जाएगा ताकि नागरिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके।
फ्लैटों की रजिस्ट्री से जुड़ी समस्या
शहर में कई फ्लैट खरीदार अभी तक अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं करा पाए हैं। विशेष रूप से राजनगर एक्सटेंशन की सोसायटियों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। इस कारण राजस्व वसूली पर असर पड़ रहा है। निबंधन विभाग अब ऐसे फ्लैट खरीदारों और बिल्डरों को नोटिस जारी करने की योजना बना रहा है।
राजस्व वसूली के लक्ष्य पर नजर
पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में निबंधन विभाग को 3,007 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य मिला था जिसमें से 2,552 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई। यह कुल लक्ष्य का 85 प्रतिशत था। इस वर्ष वसूली का लक्ष्य बढ़ाकर 3,104 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब तक 2,130 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है जो कि 69 प्रतिशत है।
आगे की रणनीति
अप्रैल से दिसंबर 2024 तक के लिए विभाग का लक्ष्य 2,316 करोड़ रुपये था, जिसमें से 2,130 करोड़ रुपये वसूल किए गए। यह लक्ष्य का 92 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभाग को अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।