हरियाणा: शहर के पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHSR), रोहतक में हुए एमबीबीएस वार्षिक और सप्लीमेंट्री परीक्षा घोटाले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति की जांच में पता चला है कि कुछ छात्रों को अवैध तरीके से पास कराने के लिए नंबरों में हेरफेर की गई थी। पीजीआईएमएस, रोहतक के निदेशक और जांच समिति के प्रमुख डॉ. एसके सिंघल ने इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है।
अवॉर्ड लिस्ट में बढ़ाए जाते थे नंबर
जांच में सामने आया कि कुछ छात्रों की आंसर शीट में दर्ज नंबर उनकी अवॉर्ड लिस्ट में लिखे नंबरों से मेल नहीं खाते थे। इससे साफ हुआ कि परीक्षा परिणाम के साथ छेड़छाड़ की गई थी। रैकेटियर ने छात्रों को फायदा पहुंचाने के लिए अवॉर्ड लिस्ट में नंबर बढ़ा दिए थे ताकि वे पास हो जाएं या उनके अंक बेहतर हो जाए।
छात्र की शिकायत से हुआ पर्दाफाश
इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब एक एमबीबीएस छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घोटाले की शिकायत की। उसने सबूत के तौर पर दस्तावेज और वीडियो भी सौंपे। स्टूडेंट ने बताया कि परीक्षा पास कराने के लिए तीन से पांच लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई।
आंसर शीट में गड़बड़ी करने में हो रहे थे नाकाम
जब रैकेटियर आंसर शीट में गड़बड़ी करने में असफल रहे तो उन्होंने अवॉर्ड लिस्ट में ही नंबर बदल दिए। रिजल्ट जारी होने से पहले ही छात्रों के नंबर बढ़ा दिए जाते थे। इस गड़बड़ी के लिए छात्रों से बड़ी रकम वसूली जाती थी।
इस तरह दिया जाता था घोटाले को अंजाम
जांच में यह भी सामने आया कि छात्र परीक्षा में मिटने वाली स्याही का इस्तेमाल करते थे। परीक्षा के बाद रैकेटियर आंसर शीट को चोरी-छिपे विश्वविद्यालय से बाहर ले जाते थे। वहां हेयर ड्रायर या अन्य तकनीक से स्याही मिटाकर सही उत्तर लिख दिए जाते थे। फिर इन आंसर शीट्स को वापस जमा कर दिया जाता था। इस पूरे खेल में रैकेटियर को छात्रों से मोटी रकम मिलती थी।
रैकेट की पहचान में जुटी समिति
अब अनुशासन समिति इस रैकेट में शामिल लोगों की पहचान में जुटी है। जांच समिति का मानना है कि विश्वविद्यालय के अंदर के भी कुछ कर्मचारी इसमें शामिल हो सकते हैं। समिति पुलिस को सभी सबूत सौंपेगी ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।
ईमानदार छात्र की वजह से सामने आया सच
इस घोटाले को एक मुखबिर, एमबीबीएस छात्र ने भी उजागर किया था जिसने जनवरी में यूएचएसआर अधिकारियों के समक्ष इस घोटाले के बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में छात्र ने बताया था कि कैसे अवॉर्ड लिस्ट में नंबर बदलकर छात्रों को पास कराया जा रहा था।