सांसदों के वेतन में अब नहीं होती मनमानी बढ़ोत्तरी!: 2016 में पीएम मोदी ने उठाई थी आपत्ति, जिसके बाद नियमों में हुए थे ये बदलाव?
सांसदों के वेतन में अब नहीं होती मनमानी बढ़ोत्तरी!

नई दिल्ली: 2016 से पहले भारत में सांसद(MP) अपने वेतन में खुद ही बढ़ोत्तरी तय करते थे। इसका मतलब यह था कि वे अपनी मर्जी से कभी भी वेतन बढ़ा सकते थे। पीएम मोदी ने इस पर सबसे पहले आपत्ति जताई और व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए। उनकी पहल पर 2018 में वित्त अधिनियम में संशोधन किया गया जिससे सांसदों के वेतन को महंगाई दर (लागत मुद्रास्फीति सूचकांक – CII) से जोड़ दिया गया और एक पूरा तंत्र विकसित किया। जिसके बाद महंगाई दर के आधार पर वेतन में बढ़ोत्तरी की जाने लगी।

इस बदलाव से पहले जब भी सांसदों का वेतन बढ़ाना होता था इसके लिए संसद की मंजूरी लेनी पड़ती थी। लेकिन अब यह प्रक्रिया स्वचालित हो गई है। नए नियम के तहत सांसदों का वेतन हर पांच साल में महंगाई दर के हिसाब से अपने आप समायोजित हो जाता है। इससे वेतन वृद्धि में राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश भी खत्म हो गई।

2018 में लागू हुआ था यह नियम

2018 में संशोधन के बाद सांसदों का मासिक मूल वेतन ₹1 लाख तय किया गया। इसके अलावा उन्हें ₹70,000 का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और ₹2,000 प्रतिदिन का दैनिक भत्ता भी मिलने लगा। इसके साथ ही मुफ्त आवास, यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाएँ भी दी जाती हैं।

मंहगाई के हिसाब से खुद बढ़ जाता है वेतन

संशोधित प्रणाली के अनुसार अब महंगाई के हिसाब से वेतन अपने आप बढ़ता रहता है। हाल ही में इस प्रक्रिया के तहत सांसदों का मासिक वेतन बढ़कर ₹1.24 लाख हो गया जो 2018 के मुकाबले 24% की वृद्धि है। यह औसतन हर साल करीब 3.1% की बढ़ोतरी के बराबर है।

राज्यों में अब भी हो रही मनमानी बढ़ोतरी

जहाँ केंद्र में सांसदों के वेतन को महंगाई दर से जोड़ने की से ये व्यवस्था पारदर्शी हो गई है तो वहीं कई राज्यों में विधायकों और मंत्रियों के वेतन में अब भी मनमानी बढ़ोतरी की जा रही है।

कर्नाटक सरकार ने वेतन को किया दोगुना

कर्नाटक सरकार ने 2025 के बजट में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने वेतन में 100% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी जिससे उनका वेतन दोगुना हो गया।

पश्चिम बंगाल में विधायकों के वेतन में की गई 50% की बढ़ोत्तरी

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने 2023 में विधायकों के वेतन में 50% की वृद्धि की थी। इससे उनका वेतन ₹80,000 से बढ़कर ₹1.2 लाख हो गया जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन में 36% की बढ़ोतरी की गई जिससे उनका वेतन ₹1.5 लाख हो गया।

झारखंड में भी हुई 50% की बढ़ोत्तरी

झारखंड में, 2024 में झामुमो सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 50% तक की वृद्धि कर दी। वहीं, दिल्ली में 2023 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने वेतन में 136% की वृद्धि को मंजूरी दी थी, जिससे उनका मासिक वेतन ₹1.7 लाख हो गया। विधायकों का वेतन भी 66% बढ़ाकर ₹90,000 कर दिया गया।

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